यदि तुम विश्वास करते हो, तुम कभी भी जान नहीं पाओगे। यदि तुम सचमुच जानना चाहते हो, विश्वास मत करो। इसका यह मतलब नहीं होता है कि अविश्वास करो, क्योंकि अविश्वास अलग तरह का विश्वास है। विश्वास मत करो, पर प्रयोग करो। अपने पर जाओ, और यदि तुम देख सको, यदि तुम महसूस कर सको, तो ही विश्वास करो। लेकिन तब यह विश्वास नहीं रहता; तब यह श्रद्धा होती है। यह श्रद्धा और विश्वास में फर्क है: श्रद्धा अनुभव से आती है; विश्वास पूर्वाग्रह है जो अनुभव के सहारे के बिना है।

 

Welcome to विश्वास तोड़ना

दोस्तों खूबसूरती से धोका, न खाइये जनाब, तलवार कितनी भी खूबसूरत क्यों न हो. मांगती तो खून ही है….!!

न कहा करो हर बार की हम छोड़ देंगे तुमको, न हम इतने आम हैं, न ये तेरे बस की बात है…!!

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो ,वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं….!!

दुश्मन बनाने के लिए ज़रूरी नही लड़ा जाए! आप थोड़े कामयाब हो जाओ तो वो ख़ैरात में मिलेंगे …

कुछ इस तरह मैंने ज़िन्दगी को आसान बना दिया ” किसी से माफ़ी मांग ली ” ” किसी को माफ़ कर दिया ”

पत्थर को लोग इसलिए पूजते हैं क्योंकि विश्वास करने लायक इंसान नहीं मिलता।

जहाँ जहाँ खबर पहुँची… हर एक ने एक ही सवाल किया… तुम्हें कैसे मुहब्बत हो गयी, तुम तो समझदार थे…

बुरा वक़्त सबसे बड़ा जादूगर है , एक ही पल में सारे चाहने वालों के चेहरे से पर्दा हटा देता है।

हर चीज वहीं मिल जाती हैं जहां वो खोयी हो, लेकिन विश्वास वहां कभी नहीं मिलता जहां एक बार खो जाता है। प्यार और विश्वास कभी भी मत खोना, क्योंकि प्यार हर किसी से नहीं होता और विश्वास हर किसी पर नहीं होता। जो आप पर आंखें बंद करके विश्वास करता हो, उसको कभी भी धोखे में मत रखो।

विश्वास जीतना बड़ी बात नहीं है,
विश्वास बनाए रखना बड़ी बात है।

विश्वास कच्चे धागे की तरह होता है जो टूट जाता है,
तो कभी जुड़ता नहीं, जुड़ता भी है तो उस में गांठ पड़ जाती है।

अपने आप पर किया गया विश्वास,
दूसरों से धोखा खाने से बचाता है।

जब विश्वास टूट जाता है तो
फिर हर रिश्ता टूट जाता है।

विश्वास रब्बर की तरह है,
जो कि हर गलती पर छोटा और कम होता जाता है।

अटूट विश्वास ही
सफलता की नीव है।

आपकी सोच ही से ही विश्वास का जन्म होता है,
और आपकी सोच से ही विश्वास का खत्म होता है।

हर व्यक्ति आप पर विश्वास करें यह जरूरी नहीं,
लेकिन आप किस पर विश्वास करते है यह जरूरी है।

विश्वास और स्वार्थ दोनों साथ-साथ चलते है,
इनमें भेद करना आपको स्वयं सीखना होगा।

आपको उन लोगों पर विश्वास जरूर करना चाहिए,
जिनको अपने आप पर विश्वास हो।

विश्वास कोहरे की तरह होता है,
जो थोड़ी सी हवा चलने पर टूट सकता है।

जब आपकी इच्छा की पूर्ति नहीं हो पाती,
तो आपका विश्वास टूट जाता है।

विश्वास समंदर की तरह है यह कितना गहरा होगा,
यह आपकी सोच और ईमानदारी पर निर्भर करता है।

विश्वास से खरीदा नहीं जा सकता,
यह तो आपके कर्मों पर निर्भर करता है।

जिस को स्वयं पर विश्वास होता है,
वह कुछ भी कर सकता है।

विश्वास करना हो तो हमेशा अपने आप पर करें,
क्योंकि स्वयं किया गया विश्वास कभी टूटता नहीं।

विश्वास पर ही हर रिश्ता कायम है,
चाहे वह प्यार का हो चाहे वह व्यापार का हो।
विश्वास, खुद पर रखो तो ताकत बन जाता है,
दूसरे पर रखो तो कमजोरी बन जाता है।

पैसे से आप सब कुछ खरीद सकते है,
लेकिन विश्वास और ईमानदारी नहीं।

जिंदगी में रिश्ते बहुत बनते है,
लेकिन विश्वास के रिश्ते कम ही बनते है।

यकीन करना सीखो,
शक तो पूरी दुनिया करती है।

आशा और निराशा दोनों,
आपके आत्मविश्वास पर निर्भर करती है।

जब जिंदगी में मुश्किलें बढ़ जाती है तो
ईश्वर पर किया गया विश्वास ही काम आता है।

विश्वास एक छोटा शब्द है
बोलो तो एक सेकेंड लगता है
सोचो तो एक मिनट लगता है
समझो तो एक दिन लग जाता है
पर साबित करने में पूरी जिंदगी लग जाती है।

ईश्वर कहता है मैं तेरे सामने नहीं आस-पास हूं
बंद कर पलकों को प्यार से, दिल से याद कर
मैं कोई और नहीं तेरा विश्वास हूं।

दिखावा और विश्वास दोनों अलग-अलग है।
विश्वास ही सत्य की परिभाषा है।

सौभाग्य और भाग्य दोनों आपके,
कर्म और विश्वास पर निर्भर करते है।

किसी पर यकीन ना हो कोई बात नहीं,
लेकिन कमजोर विश्वास किसी पर ना हो।

विश्वास उदय का कारण बनता है और
अंधविश्वास पतन का कारण बनता है।

आत्मविश्वास हो तो आप शिखर पर जा सकते है,
ना हो तो आप एक पत्थर तक नही चढ़ सकते है।

यकीन बहते हुए पानी की तरह है,
एक बार बह जाने के बाद फिर से नहीं आता।

भरोसा करना अच्छी बात है लेकिन
अपने से पहले दूसरों पर नहीं करना।

सही कर्म करो, सत्य बोलो,
लोग आप पर विश्वास नहीं तो है,
अविश्वास भी नहीं करेंगे।
प्यार और विश्वास कभी मत खोना क्योंकि
प्यार हर किसी से नहीं होता
और विश्वास हर किसी पर नहीं होता।

भरोसा सत्य से शुरू होता है और
सत्य पर ही खत्म होता है।

इस दुनिया में रिश्ते आसानी से बन जाते है लेकिन
विश्वास बनने में जिंदगी बीत जाती है।

जो आप पर आंखें बंद करके विश्वास करता है,
उसका विश्वास कभी नहीं तोड़ना चाहिए।

झूठ बोलना भरोसे की नींव तोड़ने की समान है।
हम किसी से तब ही डरते है,

जब हमें अपने आप पर भरोसा नहीं होता है।
चमत्कार आपके भरोसे में होता है,
जो पत्थर को भी भगवान कर सकता है।

जो आपको दिखाई दे जरूरी नहीं कि वह सत्य हो, नमक भी तो चीनी की तरह ही दिखता है। 

बहुत से धोखे खाने के बाद, विश्वास करना काफी मुश्किल हो जाता है

रिश्ते विश्वास की डोर पर टिके होते हैं, अगर आपको रिश्तों में जासूसी करने पड़े तो बेहतर यही है कि आप वह रिश्ता तोड़ दें

किसी पर भरोसा करने में सालों का समय लग जाता है, लेकिन भरोसा केवल एक क्षण में टूट जाता है, और टूटने के उपरांत कभी नहीं जुड़ता

भरोसा सत्य के साथ ही शुरू होता है, और यह सत्य सामने आने पर ही खत्म भी हो जाता है

वह व्यक्ति जो छोटी छोटी चीजों में आपके भरोसे की परवाह नहीं करता, उस व्यक्ति पर बड़े कार्यों के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता

विश्वास को केवल कमाया जा सकता है, और यह निश्चित समय के बाद ही कमाया जा सकता है

कई बार आप नहीं जानते कि आप किस पर भरोसा कर सकते हैं एवं किसपर नहीं। ऐसे समय में आप सीखते हैं

खुद पर विश्वास करो, जितना तुम्हें लगता है तुम उससे ज्यादा जानते हो

केवल उसी व्यक्ति पर विश्वास करें जो आपकी तीन वस्तुएं जानता हो: आपकी मुस्कुराहट के पीछे का दुख, आपके गुस्से के पीछे छुपा प्यार और आपकी खामोशी की वजह। 

अगर आप दुनिया में किन्ही तीन लोगों पर भरोसा कर सकते हैं, तो यकीन मानिए आप पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भाग्यशाली इंसान हैं

एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर तभी भरोसा करता है, जब वह दूसरे व्यक्ति में खुद की परछाईं देखता है

रिश्तों का विश्वास टूट ना जाये; दोस्ती का साथ कभी छूट ना जाये; ऐ खुदा गलती करने से पहले संभाल लेना मुझे; कहीं मेरी गलती से मेरा कोई अपना रूठ ना जाये।

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