Tension स्थिति में शांत रहना सीखें


दोस्तों आज मै एक आलेख लिखने जा रहा हूँ। 

"Tension स्थिति में शांत रहना सीखें" 



Welcome to Tension स्थिति में शांत रहना सीखें

दोस्तों जब हम लोग तनाव में होते हैं, तब कभी-कभी हमारी बॉडी इस तनाव को एक अटैक की तरह समझ लेती है और हमें “लड़ो या भागो मोड” में छोड़ देती है। इसकी वजह से एड्रेनालाईन (adrenaline) जैसे हॉर्मोन का स्राव  होता है, जो हमारी बॉडी वेसल्स को जकड़कर रखता है, आपकी साँस को तीव्र और ऊँची कर देता है, और जिसकी वजह से आपकी हार्ट रेट बढ़ जाती है। समय के साथ-साथ, हमें इस तरह की तनाव भरी प्रतिक्रिया की आदत हो जाती है, और जो हमारे दिमाग की “आटोमेटिक रियेक्टिविटी बन जाती हैं।

दोस्तों आपका शरीर जब “लड़ो या भागो” की स्थिति में पहुँच जाता है, तभी आपकी सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (sympathetic nervous system) आपके सांस लेने की प्रक्रिया को गंभीरता से गड़बड़ कर सकता है। आप जब तनाव में होते हैं, तब आपको साँस लेने में तकलीफ महसूस हो सकती है, लेकिन फिर भी कुछ लम्बी, गहरी साँस लेने पर ध्यान देना भी जरूरी है।

आपके शरीर में हर वक्त चलने वाली बातों पर ध्यान दे ,

तनाव के सोर्स :


दोस्तों क्या आपका दिल इसी लिए भरा हुआ है, क्योंकि किसी ने रास्ते में आपकी गाड़ी के सामने कट मार दिया, या फिर उस प्रेजेंटेशन की वजह से परेशान है, जो आपको दोपहर तक बॉस को देना है?  

ये, तनाव के कुछ कॉमन सोर्स हैं:


पर्सनल:


दोस्तों इस तरह के सोर्स बहुत उत्तेजक हो सकते हैं। आप, आपकी भावनाओं के बारे में भी “बहुत ज्यादा” चिंता कर सकते हैं। हो सकता है कि आप आपके रिश्तों को लेकर तनाव में हों, या फिर आपको आपकी हेल्थ  या फिर फाइनेंस से जुड़ी हुई कोई ऐसी समस्या हो, जिसकी वजह से आपको तनाव हो रहा है।

अभिन्न सोर्स : 


 आप यह भी नहीं पहचानते कि आप उससे कैसे बंधे हुए हैं। पहले अपने कदमों को जरा पीछे करें और सोचकर देखें कि आप तनाव के बारे में कैसा सोचते हैं।

बीते हुए पल: 


दोस्तों कभी-कभी हम लोग, अपने बीते हुए पलों की बातों से कुछ इतना जुड़ जाते हैं, कि हम वर्तमान में भी उसके कारण तनाव में रहने लगते हैं।

दोस्तों अपने   past  को और भी फलदायी तरीके से सोचने की कोशिश करें। जैसे कि, आप अपनी प्रवत्ति को जानने के लिए, अपने पुराने रिश्तों को जाँच सकते हैं। 

भविष्य की चिंता :


दोस्तों हम सभी लोगों को अपने भविष्य की चिंता रहती हैआप अपने बारे में अनिवार्य होने से भी बचते हैं, जो आपको आवश्यक परिवर्तन करने के लिए प्रेरित महसूस करने में मदद करेगा। हालाँकि अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने भविष्य को सुधारने की चिंता में इतना बिज़ी हो जाते हैं कि हम अपने वर्तमान समय को जीना ही भूल जाते हैं। इस तरह की विचारधारा आपके लिए मददगार नहीं हो सकती, लेकिन हाँ, आप इसे बदलना जरुर सीख सकते हैं।


उदाहरण :


दोस्तों आप अगर आने वाले किसी एग्जाम को लेकर तनाव में हैं, तो ऐसे में कटस्ट्रोफाईजिंग कुछ इस तरह का होगा: “मैंने अगर इस टेस्ट में अच्छी ग्रेड नहीं पाई, तो मैं इस कोर्स में फ़ैल हो जाऊंगा/जाउंगी। मेरा तो पूरा सेमेस्टर ही रुक जाएगा। मेरी स्कॉलरशिप भी मेरे हाँथ से चली जाएगी और फिर मैं कॉलेज नहीं पढ़ सकूंगा।

Tension की स्थिति में शांत रहने के उपाए :


दोस्तों आप आपकी लाइफ से सारे तनाव को दूर नहीं कर सकते और सच तो यही है, आप भी ऐसा नहीं करना चाहते हैं। तनाव एक बहुत अच्छा प्रेरक भी हो सकता है। ये इस बात की ओर भी एक इशारा हो सकता है कि आप जो भी कुछ करते हैं और जो करने वाले हैं, आप उसमें अपनी पूरी मेहनत लगा देते हैं। ये आपको आपके तनाव पर ज्यादा ध्यान लगाने से भी रोक सकती है। 

 प्लान और निर्णय:


तनाव के स्त्रोत से दूर रहे। आप अगर शारीरिक रूप से, तनाव के कारण से दूर भाग सकते हैं, तो ऐसा ही करें।

इस बात को समझें कि चिंता करना हमेशा ही उतना बुरा भी नहीं होता। कभी-कभी, चिंता या तनाव इस बात का इशारा हो सकता है कि आप एक महत्वपूर्ण या यहां तक ​​कि अनुपयोगी निर्णय पर विचार कर रहे हैं

 आप चाहें तो किसी पल में प्रतिक्रिया देने के लिए कुछ नई तकनीक चुनना सीख सकते हैं। आप चाहें तो आपके विचारों पर फिर से ध्यान देना चुन सकते हैं। किसी भी दृष्टिकोण का चयन करने से पहले अपने आप से कुछ सवाल जरुर करके देखें।

बदलना :


कुछ तरह के तनाव स्रोतों  को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन आप उनके प्रति आपके दृष्टिकोण को जरुर बदल सकते हैं और ऐसे में उस परिस्थिति को ही बदल सकते हैं। जैसे कि, आपके और आपके रोमांटिक पार्टनर के बीच में किसी बात को लेकर मतभेद हो गया है; ऐसा होना किसी भी रिश्ते के लिए एक आम बात है, फिर भले ही आप दोनों दुनिया के सबसे ज्यादा प्यार करने वाली जोड़ी ही क्यों न हों। हालाँकि आप अगर किसी तरह से अपने दृष्टिकोण को बदल देते हैं। 

संवेदना प्रकट करें :


अपने लिए संवेदना प्रकट करने की कोशिश करें। हम अपने जीवन के दैनिक तनाव में इतना घुस से जाते हैं कि हम उनके लिए खुद को जज करने के आदी हो जाते हैं। अपने लिए संवेदना प्रकट करने के लिए लिया गया 5 मिनट का ब्रेक भी उस समय आपकी काफी मदद कर सकता है, जब आप आपके साथ में ज्यादा रूखा बर्ताव कर रहे हैं। 

संवेदना के साथ में उसके बारे में खोज करें। इस कठिन भाग में, उस वक्त की जाँच करते वक्त, अपने और दूसरों के प्रति संवेदना दर्शाना शामिल है।


स्वीकार करना :


 भले आप कितने ही अच्छे इंसान क्यों न हों, लेकिन आपका बॉस बेहद सेल्फिश इंसान है, आप इस सच को नहीं बदल सकते।

पहले से तैयार रहे :


दोस्तों जब आपको पता है कि इस काम से पहले या बाद में ये टेंशन आएगी, तो इसके लिये तैयार रहे, और उस   टेंशन में हाइपर होने की जरूरत नहीं है।

 वैकल्पिक रूप से, बहुत सारी तनावपूर्ण परिस्थितियाँ नजरअंदाज की जा सकती हैं। यदि आप महत्वपूर्ण कम करने के लिए पहले से समय तैयार करते हैं और बस संयोग के साथ कोई योजना बनाते हैं, तो फिर बाद में आपको इस तरह के तनाव से निपटने के लिए मेहनत नहीं करना पड़ेगी। पहले से की गई रोकथाम, बाद में इलाज करने से तो कहीं बेहतर है।

यथार्थवादी लक्ष्य :


दोस्तों आप चाहे जितनी भी मेहनत कर लें, लेकिन फिर भी आप कोई कदम नहीं उठा पाते हैं, इसलिए आपको अभी भी तनाव का अनुभव होना जारी रहता है, तो ऐसा इसलिए क्योंकि संभवतः आपने यथार्थवादी लक्ष्यों को निर्धारित नहीं किया है। एक ऐसे कल्चर में, जहाँ पर लोग सिर्फ आपके काम करने को ही महत्व देते हैं, ऐसे में किसी दिए गए समय पर कुछ नहीं कर पाने की अयोग्यता को स्वीकार कर पाना मुश्किल हो सकता है। अगर ऐसी ही बात है, तो फिर आपकी समयसीमा पर एक बार फिर से नजर डालने की कोशिश करें या फिर आपकी उम्मीदों को कम कर दें। आप अगर ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो फिर ये परिस्थिति आपके द्वारा काबू न की जाने वाली परिस्थिति बन जाती है। आपके अनुभवों से सीखें, लेकिन उन्हें जाने दें। 

हमेशा छोटे-छोटे  लक्ष्य बनाए :


दोस्तों बड़े लक्ष्य बनाना एक जटिल समस्या काफी दबाव डालने वाली हो सकती है, फिर भले ही आप इसके लिए कितने ही प्रयास क्यों न कर रहे हों, बस एक बात याद रखें: हजारों मीलों की दूरी तय करने के लिए पहला कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। बस एक समय पर किसी एक छोटे लक्ष्य पर ही ध्यान दें। 

धैर्य रखे :


दोस्तों अपनी  योजनाओं को लागू करते वक्त अपने आप के लिए धैर्य का प्रदर्शन करें। एक बात याद रखें, व्यक्तिगत विकास एक ऐसी चीज़ है, जो एक चुटकी में मिलने वाली चीज़ नहीं, इसे काफी मेहनत करके पाया जाता है। आप अगर इस दौरान किसी भी तरह की चुनौती या असफलता का सामना करते हैं।

आदत बदले :


दोस्तों लेटलतीफी की आदत का जन्म अक्सर ही डर और चिंता से से होता है, जो हमें हमारी मंजिल से पहले बीच रास्ते में ही रोक सकता है। अक्सर ही, परफेक्ट बनने की आदत एक तरह की गलत सोच होती है। आप खुद को “परफेक्ट” की चाहत में इस कदर खो जाते हैं, खुशकिस्मती से, यहाँ पर ऐसी कुछ तकनीक मौजूद हैं:


कर्म करते रहे :


दोस्तों हमेशा अपने आप को याद दिलाते रहें कि आपके हाथ  में सिर्फ कुछ करना है, आप उसके परिणाम को काबू नहीं कर सकते।

इस बात को स्वीकार करें, कि “परफेक्ट होना” एक अवास्तविक मानक है। कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं बन सकता और हम सभी के “परफेक्ट” बनने के विचार भी काफी अलग-अलग होते हैं। इसकी जगह पर, आपकी ओर से आपका सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश किया करें और आने वाले परिणामों को लेकर अपने लिए किसी भी तरह की धारणा बनाने से बचें। 


आंतरिक भावनाएँ :


 दोस्तों हमेशा “चाहिए” वाले वाक्यों पर ध्यान दें। इस तरह की आंतरिक भावनाएँ, आपको ऐसी चीज़ों को करने के लिए, अपने आप को ही हराने के लिए प्रेरणा दे सकती हैं, जो आपके कंट्रोल में हैं। जैसे कि, हो सकता है कि आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं, कि “एक अच्छे स्टूडेंट को कभी भी गलती नहीं करना चाहिए।” हालाँकि, ये एक ऐसा अवास्तविक स्टैंडर्ड है, जिसे कोई भी पूरा नहीं कर सकता। इसकी जगह पर एक “कर सकता हूँ” वाला वाक्य बोलकर देखें: “अगर मैं गलती भी करता हूँ, तब भी मैं अपनी पूरी क्षमता और मेरे प्रयासों का सम्मान कर सकता हूँ। जीवन में हर कोई गलती करता है।


मेडिटेशन :


किसी वर्तमान पल को स्वीकारना और शांत रहना ही मेडिटेशन है। हर दिन के तनाव के बाद भी मेडिटेशन आपको शांत और रिलैक्स होने में मदद करता है। बिना  किसी भटकाव वाली, एक शांत जगह की तलाश के साथ शुरुआत करें। आपका टीवी, सेलफोन, कंप्यूटर आदि चालू ना करें।

अगर आपसे हो सके, तो कम से कम 30  मिनट  तक मेडिटेशन कर सकते हैं। 

अपनी ऑंखें बंद करें और गहरी और एक समान साँस लें। आपकी सांसों को जोर देकर शुरुआत करें। फिर बाद में आप अपने अन्य संवेदी अनुभवों को शामिल करने के लिए धीरे-धीरे अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

अपने  नकारात्मक विचार बदले : 


दोस्तों हमेशा जितना हो सके सकारात्मक रहने  की कोशिस करे, ये करना बहुत मुश्किल है, कियोंकि  जिंदगी में इतने टेंशन आ जाते हैं , पर अपने चेहरे पर  हमेशा smile रखे। 

बिना किसी अनुमान लगाए, अपनी अन्य संवेदनाओं पर ध्यान दें। आपके सामने आने वाले विचारों को सिर्फ एक विचार की तरह ही स्वीकार करें। 

दोस्तों आप अगर अपने आप को विचलित होता हुआ पाते हैं, तो अपने विचारों को फिर से वापस सांसों पर ध्यान लगाने पर केंद्रित कर दें।

एक ब्रेक ले लें :


अगर आपको लगता है/ लगती है  कि आपके पति/पत्नी के साथ अब माहौल बिगड़ते जा रहा है, तो रुक जाएँ और फिर कुछ ऐसा बहाना बनाकर वहाँ से चले जाएँ,

मैं कर सकता/सकती हूँ।” जब भी नेगेटिव विचार आते हुए नजर आएँ, तो खुद से कुछ पॉजिटिव बातें दोहराकर, इन्हे रोकने की कोशिश करें।

उदाहरण:

“मैं अपनी प्रॉब्लम्स से बड़ा हूँ।” 

“मैं एक इंसान हूँ। हम सब गलतियाँ करते हैं।” 

“ये अस्थायी है और ये गुजर जाएगा।”

“मैं इसे कर सकता हूँ।/सकती हूँ

उत्तेजना रोके :


तनाव के समय और खासकर गुस्से में आग-बबूला होने या फिर किसी और को चिल्लाने की उत्तेजना को रोकने की कोशिश करें। किसी को चिल्लाना, फिजिकल वायलेंस के जरिये।  इसकी जगह पर कुछ अलग या कम हानिकारक, जैसे कि स्ट्रेस बॉल को दबाने की कोशिश करें।

भगवान पर छोड़ दे :


हर बात के लिए अपने आप को दोषी न ठहराएँ। कभी-कभी ऐसा होता है कि आपके लाखों कोशिश करने के बाद भी प्रॉब्लम वहीं की वहीं बनी रहती है, ये ठीक नहीं हो पाती। किसी भी चीज़ से हारना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन अपने ऊपर ही हार मान लेना और खुद को कोसने लगने से उल्टा आप को ही कुछ नुकसान हो सकता है।

अपनी तरफ से इलाज करने की कोशिश ना करें। अल्कोहल या अन्य किसी तरह के ड्रग्स आपको सिर्फ अस्थायी रूप से राहत दे सकते हैं, लेकिन आपकी प्रॉब्लम्स, वास्तविक दुनिया में आपका इंतजार कर रही होती हैं। और दूसरी ओर, क्या आप आपकी लाइफ में एक बुरी लत पाना चाहते हैं?

निष्कर्ष :


दोस्तों अंत में यही कहूंगा कि तनाव या तनाव से निपटने में असमर्थता के लिए अनुचित प्रतिक्रियाएं आपके जीवन से वर्षों को दूर कर सकती हैं। यह सच है कि सब कुछ कर पाना संभव नहीं है, लेकिन अगर आप बस बैठकर सोचते रहेंगे, तो कुछ भी बदलना भी असंभव हो जाएगा।

आप अगर रोना चाहते हैं, तो रो लें। कभी-कभी आपको बस रोना होता है। ऐसा करके भी आपको सच में बहुत अच्छा महसूस हो सकता है।

कुछ आरामदायक म्यूजिक सुनें।

गर्म पानी का शावर लें या नहायें। शारीरिक गर्मी से कई लोगों में आराम का प्रभाव देखा गया है।
सलाह

अपने विचारों और चिंताओं को डायरी में लिखकर रख लें। इस तरह से आप उन्हें प्राइवेट तरीके से और ज्यादा बेहतर तरीके से प्रोसेस कर सकते हैं, इन्हें अपने मन और सीने से बाहर निकाल सकेंगे।

एक हल्की सी झपकी ले लें। ये आपको आपका निर्णय स्पष्ट करने में मदद करेगा। इससे आपको स्पष्टता प्राप्त होगी और आपको एक वाजिब निर्णय मिल जाएगा।

स्टेप्स की एक लिस्ट तैयार करें। हर एक इंसान अलग होता है; आपके भी अपने लिए कुछ अलग स्टेप्स होने चाहिए।

अपनी डिवाइस पर पसंदीदा गेम खेलकर या फिर टीवी में अपना पसंदीदा कार्यकर्म देखकर अपना ध्यान भटकाने की कोशिश करें।

किसी तनाव भरी परिस्थिति में खुद को शांत करना सीखने के ना सिर्फ शांतिदायक प्रभाव होंगे; बल्कि समय के साथ-साथ, इसकी वजह से आपको और भी बेहतर और खुशहाल जिंदगी की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।


दोस्तों आपसे अपील है कि , मेरी बातो पर सही से  सोचियेगा ,जरूर अगले ब्लॉग में फिर मिलेंगे, एक नए टॉपिक पर,  तब तक के लिए हंसते -रहिए ,हँसते – रहिए ,जीवन अनमोल है, मुस्कुराते रहिए ! 

धन्यवाद 

Powered by Blogger.