आत्मसम्मान का महत्व

दोस्तों अपने अवचेतन मन की शक्ति का इस्तेमाल करके आप नकारात्मक और आत्म-सम्मान के आभाव से कैसे उभर सकते हैं। दोस्तों यदि आप तनावग्रस्त या चिंतित हैं कि कोई भी आपको कद्र नहीं करेगा, दूसरा तो केवल सलाह दे सकता है लेकिन दुःख का अनुभव तो सिर्फ तुम ही अनुभव कर सकते हो। 


तो दोस्तों यह लेख मै इसी बात पर ही लिखने जा रहा हूँ, इस लेख में आपको बताऊंगा कि आप और सिर्फ आप ही अपनी प्रतिक्रियाओं, विचारों व भावनाओं के लिए उत्तरदायी हैं। आप सीखेंगे कि स्वयं से प्रेम कैसे करें, मानसिक शांति कैसे पाएँ, दूसरों के प्रभुत्व से छुटकारा कैसे पाएँ और सुखद, सफल जीवन कैसे जिएँ। दोस्तों आज का टॉपिक है 
"आत्मसम्मान का महत्व"

आत्म सम्मान क्या है:

Welcome to आत्मसम्मान का महत्व


दोस्तों आत्म सम्मान का अर्थ है स्वयं का सम्मान करना स्वयं को समझना अपने आप पर गर्व करना। आत्म सम्मान हमेशा आत्म विश्वास के साथ आता है और खुद पर इतना विश्वास होना चाहिए की आप अपने महत्व को जान सके। खुद के महत्व को जानकर खुद का सम्मान करना ही आत्म सम्मान कहलाता है। जो व्यक्ति स्वयं का सम्मान करता है वो ही दुसरो से सम्मान पाता है। आत्म सम्मान वो है जहाँ आपको अपना निरादर होता हुए लगे वहाँ तुरंत आपका अपने द्वारा उसका विरोध करना। अपने आपको महत्वपूर्ण बनाओ की आप अपना महत्व स्वयं समझ सको। जब आप अपना महत्व जान जाओगे तो आत्म सम्मान भी समझ जाओगे। जो स्वयं आत्म सम्मान नहीं कर सकता उनका फिर दूसरे भी सम्मान नहीं करते है।

इंसानों के आत्मसम्मान को कोई ठेस पहुंचाए तो वह किसी भी हद तक गिर सकता है और कुछ भी कर सकता है। इसीलिए हमें सबकी इज्जत और आदर करना चाहिए
जब कभी हम अपने जीवन में बड़ी-बड़ी उपलब्धियां प्राप्त करते हैं, तो हमारे अंदर आत्मसम्मान की भावना आती है।जीवन में सफलता और प्रसन्नता की अनुभूति का आधार आत्मसम्मान और आत्मगौरव की स्वस्थ भावदशा ही है। आत्मसम्मान की कमी का प्रमुख कारण जीवन के नकारात्मक पक्ष से गहन तादात्म्य की स्थिति होती है। भ्रमवश इसी पक्ष को हम अपना वास्तविक स्वरूप मान बैठते हैं, जबकि यह तो व्यक्तित्व का मात्र एक पक्ष होता है। वास्तविक रूप तो हमारा उच्चतर 'स्व' है, जो ईश्वर का दिव्य अंश है। आत्म-सम्मान, आत्मविश्वास का प्रथम सूत्र है।इसके साथ अपने जीवन के प्रति पूर्ण जिम्मेदारी का भाव दूसरा चरण है। आत्म-विकास और उन्नति के साथ दूसरों के सुख-दुख में भागीदारी हमारे आत्मसम्मान को बढ़ाएगी। दूसरे के सुख और उत्कर्ष में प्रशंसा, वहींदुख व विषम समय में सांत्वना-सहानुभूति का सच्चा भाव भी आत्मसम्मान को बढ़ाने का अचूक तरीका है।
आत्म-सम्मान ही ऐसी निर्मल धारा है जोकि हमारी कलुषित भावना को धो देती है । ऐसी पवित्र धारा में स्नान करके हम अपने वर्तमान और भविष्य को उज्जल बना लेते हैं । देश को हम पर अभिमान होता है । हमारी आत्मा सुख और शान्ति में बनी रहती है । हमारे साथी हमें विश्वास का दृष्टि से देखते हैं । 

Welcome to आत्मसम्मान का महत्व


समाज में हमें सम्मान प्राप्त होता है । इसी के बल पर हम अपनी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा कर सकते हैं । इसी के कारण सफलता हमारे कदमों को चूमती रहती है अत: प्रत्येक व्यक्ति के अपने आत्म-सम्मान की रक्षा करनी चाहिए ।
 
लोग कहते थे
तुझे बराबर का हक़ दिया
साथ खड़े होने का हक़ दिया
अपनी बात बोलने का मौका दिया
लेकिन आज भी
मैं पूछती हूँ,
मुझे सम्मान कहाँँ दिया ?
हक़ सारे दिए,
आत्म सम्मान कहाँँ मिला ?
हर रास्ते में डर है
हर मोड़ पर आते ही
सन्नाटे में किसी के न आने की प्रार्थना
डर का साया है।
कहाँँ है मेरा सम्मान ?
घर से निकलते ही बोले
मत जा डर है
कुछ बोलू़ंं तो बोला जाए,
शांत रह !
आप लड़का न बने !
मर्जी से जीने नहीं मिला
डर है
इज्जत का ख्याल रख
बाहर डर है
कहाँँ है मेरा सम्मान ?
बेड़ियों में ऐसी उलझी सोच
कि कपड़े से चरित्र और
चरित्र से कपड़े देखे
कहाँँ है हमारा हक़ ?
यही सम्मान है ? 

आत्म सम्मान क्यों किया जाता है : 

दोस्तों आत्म सम्मान आवश्यक है अगर आप स्वयं का सम्मान नहीं कर सकते तो क्या दुसरो का सम्मान करेंगे और क्या दुसरो से सम्मान पाएंगे कुछ नहीं प्राप्त होगा। अगर आपका बेवजह निरादर किया जाता है और वहाँ पर उसके विरुद्ध आपकी कोई प्रतिक्रिया नहीं है तो वहाँ आप अपना आत्म सम्मान गवाँ रहे है जो की नहीं होना चाहिए जो इंसान एक बार आपका निरादर कर सकता है वो बार बार कर सकता है। जहाँ आपको लगे की आपके साथ कुछ गलत हो रहा है तो उसका विरोध करे। इंसान अपनी छवी स्वयं बनाता है की वह किस प्रकार का बनना चाहता है। अगर शुरू से अपनी एक अलग ही छवी हो तो उस इंसान का रुतबा ही कुछ और होता है।
दोस्तों आत्म-सम्मान और आत्म-मोह, दोनों में अंतर है। स्वयं की फोटो खींचना भी कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन सब कुछ भुलाकर केवल उसी में लगे रहना अच्छा नहीं। बार बार खुद की फोटो खींच कर अपने प्रोफ़ाइल पर लोड़ करने से आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति होती है, ऐसा अगर आप सोचते हो, तो कहीं कुछ गड़बड़ है।
आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति इतनी सस्ती नहीं हो सकती, कि खींची खुद की फोटो और कर दी अपलोड। आत्मसम्मान पाने के लिए कुछ त्यागना पड़ता है और कुछ कमाना पड़ता है। अपने अहंकार को और आरामदेह परिस्थिती को त्यागना होता है। गुणों को पहचान कर, अपने कौशल को निखार कर, जीवन के सिद्धांतों, मूल्यों और आदर्शों को निश्चित करना होता है। जिस से आत्म विश्वास पनपता है…. उस के बाद आत्म-सम्मान। कितनी भी विपरीत परिस्थिति हो किसी भी कीमत पर अपने सिद्धांतों, मूल्यों और आदर्शों से समझौता ना करना यानी आत्मसम्मान।

तो दोस्तों जिन्हें आत्म-सम्मान चाहिये, उन्हें पहले आत्म-ज्ञान की ओर जाना पड़ेगा, अपने आप को जानना पड़ेगा। और अपने आप को जानना क्या है? अपनी दिनचर्या को जानना, सुबह से शाम जो हम कर रहे हैं, उसको जानना; यही आत्म सम्मान है। जिनको आत्म-सम्मान की तलाश हो वो अपने ऊपर गौर करना शुरू करें। जो अपने आप को नहीं देखता, वो अपना सम्मान नहीं करता। जो अपने आप को नहीं जानता, वो अपना सम्मान नहीं करता। 

अपना आत्म सम्मान कैसे बढ़ाए?:

1. अपनी ताकत को पहचाने: 

अपनी शक्तियों की तीन अलग-अलग सूचियां बनाएं उपलब्धियां और आपके गुण जिसे आप प्रशंसा करते हैं. इन सूचियों की तैयारी के लिए अपने दोस्तों, माता-पिता और अन्य शुभचिंतकों से सहायता लें. ये सूचियां आपकी क्षमताओं और भलाई को समझने में आपकी मदद करेंगी. आप अपनी ताकत में विश्वास करने में सक्षम होंगे. आपको कम से कम एक बार इन सूचियों के माध्यम से पढ़ना होगा. 

2. सकारात्मक बनें: 

आशावाद और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण सफलता की कुंजी है। आपका आत्म-सम्मान इस तथ्य से प्रभावित है कि आप जीवन को कैसे देखते हैं। यह अपरिहार्य है कि आपको गंभीर परिस्थितियों या जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन महत्वपूर्ण यह है की अपने काबिलियत पर भरोसा रखे। सकारात्मक बनें और अपने बारे में नकारात्मक विचारों को विकसित करना बंद करें। 'मैं एक हारे हुए', 'मैं इस समस्या से छुटकारा नहीं पा सकता हूं' जैसे विचारों से छुटकारा पाएं. .अपने शरीर का ख्याल रखें: आपकी बाहरी उपस्थिति कभी-कभी आपके भीतर के आत्म सम्मान को उठाने में मदद करती है। अपने आप को साफ रखें, दाढ़ी या बाल ट्रिम करें, अपने नाखून काट लें, अपने दांतों को फ़्लॉस करे और भलाई की भावना विकसित करने के लिए समग्र व्यक्तिगत स्वच्छता को बनाए रखना न भूलें. 

3. अच्छी नींद ले: 

अपने आत्म सम्मान को बढ़ाने के लिए एक अच्छी नींद आवश्यक है। सही खाएं। एक संतुलित आहार अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। सही तरीके से स्वस्थ भोजन खाने से आपका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य ठीक रहता है। अपने नियमित भोजन में खनिज और विटामिन शामिल करे। भोजन लेने के दौरान टेलीविजन या रेडियो जैसे आदते से बचें। 

4. व्यायाम:

नियमित कसरत आपको मानसिक बीमार स्वास्थ्य से दूर रखती है। सबसे पहले शांत और आरामदायक रहे। जब आपकी ड्रेसिंग की बात आती है, तो उन परिधानों को रखने का प्रयास करें जिन्हें आप अच्छी तरह से ले जा सकते हैं। उन चीज़ों को पहनें जिन्हें आप सबसे अधिक पसंद करते हैं। यदि आप किसी विशिष्ट समस्या के बारे में चर्चा करना चाहते हैं। तो आप एक डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं।

5 . अतीत को मुक्त करो:

जो किया जाता है उसे वापस नहीं किया जा सकता है और उसे ठीक नहीं किया जा सकता अपनी गलतियों के लिए खुद को क्षमा करें। अपराध बोध से मुक्त हों। कभी भी खुद को दोष न दें या खुद को नकारात्मक भाषा में व्यक्त न करें। 

6 . रोजाना दोहराएं:

केवल उन्हें संबोधित सकारात्मक बयानों से आत्मसम्मान में वृद्धि होती है। आप प्रशंसा और प्रशंसा के योग्य हैं। उन्हें धन्यवाद के साथ ले लो। "कुछ खास नहीं" आदि कहने के बाद, आप अवचेतन रूप से अपने महत्व को कम करते हैं और आपने जो कहा उसे अस्वीकार करते हैं। 

7. अपने परिवेश का विश्लेषण करें"

उन लोगों के साथ संपर्क करने का प्रयास करें जो व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए कॉन्फ़िगर किए गए हैं। निराशावादी दूसरों के आवेगों का दमन करते हैं। ऐसे लोगों के संपर्क से खुद को बचाएं, ताकि आपके मानस को उनसे संवाद करने में परेशानी न हो।

8 .उदासीनता से दूसरों के प्रति अच्छा करना सीखें: 

बदले में कुछ मांगने की जरूरत नहीं। दूसरों की मदद करें, उन्हें प्रोत्साहित करें और प्रोत्साहित करें। एक इनाम के लिए दावों की अनुपस्थिति हमारी अपनी आँखों में व्यक्तिगत विकास की दिशा में एक और कदम है। अपने अच्छे कामों का आनंद लें। 

9. शौक या अन्य पसंदीदा व्यवसाय करना:

वह करो जो तुम्हारी आत्मा को है। यदि आपका काम आपको खुशी देता है, तो आप इसे अच्छी तरह से कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि इससे आत्म-सम्मान बढ़ता है। चाहे वह एक शौक है या एक मुख्य काम है, मुख्य बात यह है कि आप व्यक्तिगत रूप से इसे पसंद करते हैं।

दोस्तों जो ऊपर बताया है आप इस सूची को लंबे समय तक जारी रखा जा सकता है।

आत्म सम्मान के लिए क्या जरुरी है : 

दोस्तों आत्म सम्मान के लिए एक अच्छी और सकारात्मक सोच का होना बहुत जरुरी है। एक ऐसी सोच रखिए की आपसे बेहतर इस दुनिया में कोई नहीं। खुद को इस काबिल मानो की आप अपनी इज्जत कर सको। आत्म सम्मान के लिए जरुरी है अच्छी आदत अच्छी संगत। झूठ का सहारा कभी ना ले झूठे और दोगले लोगो से हमेशा दुरी बनाये रखे। अपने आप को पहचानिए आप क्या है। अपनी कमियों को ढूंढिए और उनको दूर कीजिए। लोग सिर्फ दिलासे देते है की आप यह करो वो करो हम आपके साथ है लेकिन सच बता दूँ दोस्तों आपको जीवन भर साथ देने वाला कोई नहीं आपके जीवन के सफर को आपको अकेले को तय करना है। इसके लिए जरुरी आप अपने आप को महत्व दीजिए। 

आत्म सम्मान कैसे किया जाता है :

जब आप दुसरो का सम्मान करते हो तो आपको भी सम्मान मिलेगा। दुनिया में भांति भांति के प्राणी है सबकी सोच एक जैसी हो संभव नहीं हम सिर्फ प्रयास कर सकते है। किसी की सोच को सकारात्मक करने का लेकिन बदलना तो उसी को है। अगर आपको जीवन का सफर खुशमय बनाना है तो सबसे पहले आपको स्वयं को महत्वता देनी पड़ेगी। खुद को कभी किसी से कम मत समझो दुनिया का प्रत्येक प्राणी आपकी और मेरी तरह है तो इंसान ही ना की भगवान। आत्म सम्मान के लिए जरुरी है अंदर के डर को ख़त्म करना।
दोस्तों कई बार कुछ लोगो के साथ ऐसा होता है वो खुद का भी सम्मान करते है और दुसरो को भी सम्मान देते उसके बावजूद भी लोग उनकी कदर नहीं करते है। इसके लिए आपको आपके विरुद्ध कुछ भी होता दिखे तो सही समय पर उस पर प्रतिक्रिया दे उसका विरोध करे ऐसा करने पर सामने वाला भी आपके महत्व को समझेगा। 
  
इंसान कोई छोटा नहीं होता छोटी सिर्फ इंसान की सोच होती है। अगर आप स्वयं को महत्व नहीं देंगे तो आपके अपने भी आपको इतना महत्व नहीं देंगे, दुसरो से तो उम्मीद छोड़ दो। जब आप अपने महत्व को समझने लगेंगे तो दुनिया भी आपके महत्व देगी। आपको अपना जीवन अपने हिसाब से जीना है तो आपको अपना आत्म सम्मान करना ही पड़ेगा। 

आत्म सम्मान के प्रभाव : 

सम्मान करने के बहुत फायदे है चाहे वो खुद का हो या दुसरो का सम्मान करना चाहिए। दुसरो का अपमान करके आप कभी यह उम्मीद मत करना की दुसरो से आप दिल से सम्मान पाएंगे। आत्म सम्मान करने वाले लोग कभी किसी से पीछे नहीं रहते वो दुनिया से दो कदम आगे चलते है क्योंकि वो स्वयं के महत्व को समझते है।
अपने महत्व को समझो और दुसरो के महत्व को भी समझो हर कोई अपनी जगह महत्वपूर्ण है। अगर आप आत्म सम्मान करते है तो किसी की हिम्मत नहीं जो आपका अपमान करदे।
आत्म सम्मान (self respect) का प्रभाव उन लोगो पर कभी नहीं पड़ता जो झूठे बईमान धोखेबाज़ होते है। ऐसे लोग किसी को इज्जत देके भी कभी किसी के दिल में अपने प्रति मान सम्मान इज्जत नहीं बना सकते।
दोस्तों कुछ लोग आपसे दूरी इसलिए बना लेते है की आप उनका सम्मान नहीं करते, लेकिन वो अपनी आत्म सम्मान करना जानते है। इस तरह से कई रिश्ते कई दोस्त कई लोग आपस में बिछड़ जाते है।
आत्म सम्मान को अगर दुसरो में खोजोगे तो कभी नहीं मिलेगा खुद की इज्जत करना और खुद की महत्वता को समझना ही आत्म सम्मान (self respect) है।
आप अगर अपना आत्म सम्मान करते हो, तो दुनिया की कोई ताकत आपका अपमान नहीं कर सकती।
जीवन की सफलता के लिए जरुरी है आत्म सम्मान।

आत्मसम्मान कहने के लिए तो सिर्फ एक शब्द है, लेकिन यह इंसान की भावना से जुड़ा होता है। जिसके अंदर आत्मसम्मान नहीं उसकी इज्जत नहीं और जिसकी इज्जत नहीं उसके जीने का अर्थ नहीं।
निपुण के विश्लेषण के साथ व्यक्तिगत विकास शुरू हो सकता है। हर दिन आप गलतियों से भी, जीना सीखें। यह सब आपका जीवन, आपकी पसंद, आपका अनुभव है। पढ़ें, शैक्षिक वीडियो देखें, नई चीजें सीखें।

दोस्तों हर उस चीज की जिम्मेदारी लें जो आपके साथ होती है और नहीं होती है। आपका जीवन आपके हाथों में है। केवल आपको ही इसकी योजना बनाने का अधिकार है। दूसरे लोगों की तरफ मत देखो। निर्णय स्वयं लें। दूसरों से प्रतिक्रिया की उम्मीद न करें, यहां तक कि निकटतम भी। अपनी पसंद बनाएं, अपनी योजना को मूर्त रूप दें और गलतियों से न डरें। इस समय, अपने आप पर काम करना शुरू करें, संकोच न करें! यदि आप अभी भी बैठे हैं तो आपका आत्म-सम्मान अपने आप नहीं बढ़ेगा। भाग्य द्वारा फेंकी गई हर चुनौती को स्वीकार करें। वास्तव में, कार्रवाई में आपके पास एक सकारात्मक दृष्टिकोण होगा, आत्म-सम्मान बढ़ेगा, और परिणामस्वरूप, आत्म-सम्मान।

सवाल हो की आत्म सम्मान कौन नहीं कर सकता तो जवाब है जो व्यक्ति दुसरो की सवयं की इज्जत नहीं कर सकता वो व्यक्ति कभी आत्म सम्मान नहीं कर सकता। जिसे खुद को नहीं पता वो क्या है वो स्वयं का आत्म सम्मान नहीं कर सकता। जिस व्यक्ति का एक बार अपमान हो जाए और वो बार बार उसी गलती को दोहराये वो व्यक्ति आत्म सम्मान नहीं कर सकता। इसलिए खुद का सम्मान करोगे तो दुसरो का सम्मान कर पाओगे और दुसरो का सम्मान करोगे दुसरो से सम्मान पाओगे। दुनिया में ऐसे लोगो की कमी नहीं है, भरे पड़े है जो बात उन्हें नहीं कहनी चाहिए वो भी काफी लोगो के बिच कहकर आपका अपमान कर देते है। अगर आप उस समय चुप रहेंगे तो समझिए आपकी self respect में कमी है।

जीवन में हमेशा यह फार्मूला रखो if you respect someone will you be respected

दोस्तों अगर आपके जीवन में अगर ये हो रहा है की आप कुछ बुरे लोगो से दुरी अपनी SELF RESPECT रखने के लिए कर रहे है तो अगर लोग इसे चाहे ATTITUDE समझे तो समझने दो। लोग क्या कहेंगे यह महत्वपूर्ण नहीं है हाँ अपनी आत्म सम्मान बहुत महत्वपूर्ण है।

मैं दुसरो से अपना अपमान सहन नहीं कर सकता क्योंकि मुझे अपनी आत्म सम्मान करनी आती है।

Welcome to आत्मसम्मान का महत्व

दोस्तों आप कभी कभी अपने आप को शीशे में देखो की क्या कमी रह गयी जो आप अपना आत्म सम्मान तक खो बैठे, दुनिया में कई ऐसे लोग है जिनके हाथ-पैर आँखे शरीर के कई अंगो में कमी रह जाती है, लेकिन वो लोग दुनिया में अपना नाम कर रहे है। अपनी प्रतिभा को दिखा रहे है क्योंकि उन्होंने अपने महत्व को समझा उन्हें पता था की आत्म सम्मान कैसे किया जाता है। 

ईश्वर ने आपको शारीरक रूप से परिपूर्ण बनाया है। खुद का सम्मान करे अपने आपको इतना महत्वपूर्ण बनालो की किसी की औकात नहीं आपका अपमान करदे ! 

आत्म सम्मान ही बताता है की आपके भाग्य की चाबी आपके पास है।

दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि यह article आपको पसंद आया होगा , please कमेंट के द्वारा feedback जरूर दे। आपके किसी भी प्रश्न एवं सुझाओं का स्वागत है , अगर आप मेरे आर्टिकल को पसन्द करते है तो जरूर Follow करे ताकि आपको तुरंत मेरे आर्टिकल आपको मिल जाए। 

धन्यवाद 


No comments:

Powered by Blogger.