नमस्कार दोस्तों मैं हूं आपका दोस्त LifeWithAshish  और आज का आर्टिकल 

"जो लोग अपनी सोच नहीं बदल सकते वे कुछ नहीं बदल सकते" 


पर आधारित लिख रहा हूँ। 

Welcome to जो लोग अपनी सोच नहीं बदल सकते वे कुछ नहीं बदल सकते 

दोस्तों हमें अपने जीवन में सफल होने के लिए अच्छी सोच की जरूरत होती है हर व्यक्ति अपने जीवन में सफल होना चाहता है लेकिन गलत सोच की वजह से वह अपना हौसला छोड़ देते हैं इस आर्टिकल में  मनुष्य की सोच पर आधारित हैं, जो आपके मन में नकारात्मक विचारों को दूर करके आपके भीतर जोश, उत्साह, उमंग, और गहरा आत्मविश्वास पैदा करेगा जिससे आप नकारात्मक विचार छोड़कर सफलता के पथ पर अग्रसर हो जाएंगे।

दोस्तों मनुष्य की सोच परिवर्तनशील होती हैं जो समय-समय पर माहौल के हिसाब से बदलती रहती हैं। कई बार ऐसा समय आ जाता हैं जब हमारे चारों और सभी चीजें नकारात्मक हो रही होती है

हम जानते है की मनुष्य अपने विचारो से बना होता है, वह जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है। सिर्फ थोड़ा सा नजरिये का अंतर -नकारात्मक या सकारात्मक सोच का। 


पैर की मोच और छोटी सोच,
हमें आगे बढ़ने नहीं देती ।
टुटी कलम और औरो से जलन,
खुद का भाग्य लिखने नहीं देती ।
काम का आलस और पैसो का लालच,
हमें महान बनने नहीं देता ।
अपना मजहब उंचा और गैरो का ओछा,
ये सोच हमें इन्सान बनने नहीं देती ।
दुनिया में सब चीज मिल जाती है,
केवल अपनी गलती नहीं मिलती। 

सोच ही इंसान को आगे ले जाती है जब जब किसी इंसान पर मुसीबत आती हे या किसी प्रकार के कर्जे का टेंशन रहता है तो वह अपने खर्चे कम करने लगता है या अपने शोक की जरूरतों को मारकर बचत करने लगता है लेकिन, कर्जा कभी कम नहीं होता।यह उसकी सोच पर निर्भर करता है कि उसको क्या करना चाहिए। 


सोच  के  प्रकार :

कहीं मतलबी "सोच" है,
तो कहीं ईर्ष्यालु "सोच" है।
कहीं प्यार भरी "सोच" है ,
तो कहीं झगड़ालू "सोच" है।
कहीं रंगभेदी "सोच" है,
तो कहीं नस्लभेदी "सोच है।
कहीं संकी "सोच"है,
तो कहीं आतंकी "सोच" है।
कहीं तेरी "सोच" है,
तो कहीं मेरी "सोच" है।
कहीं इसकी "सोच" है,
तो कहीं उसकी "सोच" है।
कहीं अच्छी "सोच" है,
तो कहीं बुरी "सोच" है।
कहीं झूठी "सोच" है,
तो कहीं ख़री "सोच" है।
कहीं धर्म की "सोच"
तो कहीं जात-पात की "सोच। 
कहीं अमीरी-गरीबी की सोच",
तो कहीं तेरी 'औकात' की "सोच

सोचने के ढंग :

कोई बे-ईमानी की "सोच" रखता है,
तो कोई ईमानदारी की। 
कोई गद्दारी की "सोच" रखता है,
तो कोई वफ़ादरी की।
कोई इंसानियत की "सोच" रखता है,
तो कोई हैवानियत की।
कोई मासूमियत की "सोच" रखता है,
तो कोई एहमियत की।
कोई अंहकार की "सोच" रखता है,
तो कोई भ्रष्टाचार की।
कोई फरेब की "सोच" रखता है,
तो कोई एतबार की।
कोई सकारात्मक "सोच" रखता है,
तो कोई नकारात्मक,
कोई आध्यात्मिक "सोच" रखता है,
तो कोई विचारात्मक।


दोस्तों   "सोच" ऐसी हो, जिसमें विश्वास हो। इंसानों की कद्र और दर्द का एहसास हो। जब "सोच" की दिशा इंसानियत की राह में जायेगी। तब हरेक ज़िन्दगी 'जीवन' जीने की चाह पायेगी। 


दोस्तों  गरीब का दुःख बंधा-बंधाया होता है। वह वही-वही दुःख उठाता है रोज। अमीर नए-नए दुःख उठाता है, बस इतना ही फर्क होता है। गरीब उन्हीं कपड़ों में परेशान होता है, अमीर रोज-रोज नए कपड़ों में परेशान होता है। बस इतना ही फर्क होता है।

गरीब-अमीर का फर्क क्या है? बस इतना ही फर्क है। न तो गरीब सुखी है न अमीर सुखी है। दोनों दुःखी हैं।सफलता की राह का पहला कदम होता है सोच, गलती हर इंसान से होती है। 

दोस्तों  आपकी सोच ही आपको सफलता की मंजिल तक ले जाती है। यदि आप के पास सोच नहीं है तो समझ लीजिये आप के पास कुछ नहीं है। सोच के बिना आप उस चीज को हासिल नहीं कर सकते हैं जिसे आप पाना चाहते है।

जीवन में सफलता पाने का सबसे सरल तरीका है अपनी सोच को सफलता की दिशा में मोड़ना। इसलिए इस बारे में सोचना शुरू करिए,  जो व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

दोस्तों  आपको तय करना होगा, आप अपनी लाइफ को किस तरह से देखते हो। हमें रोज़ सुबह नई सोच के साथ जगाना चाहिए।  हमेशा नई सोच के दिन अच्छा सोचना चाहिए और अच्छे काम करने चाहिए।  हमेशा हर दिन कुछ नया सीखना चाहिए।  जब हम नई सोच के साथ हम अपने जीवन के लक्ष्य पूरा कर सकते है। 

अपने अक्सर देखा होगा प्रोब्लेम्स तो हर इंसान की लाइफ में होती है हर इंसान किसी न किसी तरह की समस्या से जूझ रहा होता है, लेकिन जिसकी अच्छी  सोच होती है और जो इंसान आत्मविश्वासी होता है वह अपनी प्रोब्लम्स को खुद ही हल  करता है, इसीलिए पहले आप अपनी प्रोब्लेम्स को खुद हल  करे उसी के बाद आपकी सोच अच्छी हो पायेगी।  जो चाहूंगा,  पहनूंगा जिस स्त्री से प्रेम होगा, विवाह करूंगा; जिस मकान में रहना है, वह मकान लूंगा; जिस कार में चलना है, वह कार लूंगा। 

Welcome to जो लोग अपनी सोच नहीं बदल सकते वे कुछ नहीं बदल सकते 


लाख बदल लो आइना
चेहरा नहीं बदलता,
हथेलियों पर खींचने से लकीरें,
मुक़दर नहीं बदलता,
सोच से ही है सब कुछ,
बिन सोचे कुछ नहीं बदलता। 
"जीत सोच पर निर्भर करती है,
मान लो तो हार होगी,
और ठान लो तो जीत। 
 
दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि यह article आपको पसंद आया होगा , please कमेंट के द्वारा feedback जरूर दे। आपके किसी भी प्रश्न एवं सुझाओं का स्वागत है , अगर आप मेरे आर्टिकल को पसन्द करते है तो जरूर Follow करे ताकि आपको तुरंत मेरे आर्टिकल आपको मिल जाए। 



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