जैसा सोचोगे वैसा आप बन जाओगे

दोस्तों दुनिया में कुछ ही लोग सम्मान, ख़ुशी, दौलत, समृद्धि, और सफलता क्यों हासिल कर पाते हैं; जबकि अधिकतर लोग एक औसत जीवन ही जी पाते हैं? तो दोस्तों आज हम इसी टॉपिक पर आलेख लिखने जा रहे हैं। 

जैसा सोचोगे वैसा आप बन जाओगे

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इसकी वजह क्या है? ऐसा क्यों होता है?

शायद कुछ लोग यहाँ पर ये सवाल कर सकते है की ये बड़ी सोच क्या बला है? सच में..! लोगो के सोच में अंतर होता है। उनके शिक्षा, अनुभव, माहौल और जरूरते भले ही उनकी सोच पर प्रभाव डालता है, लेकिन फिर भी इन्सान की सोच का आकार अलग अलग होता है।

हुनरमंद लोग जिन्होंने कमजोरियों को जीता, 
बड़ी सोच वाले लोग बहुत कम क्यों है?

हाँ, ये सच है, लोग सोचते ही नहीं!


हमारे जीवन वही सब और उतना ही अच्छा (बुरा) होता है जिसकी हम जितनी अच्छी( बुरी) कल्पना कर सकते हैं। जो चीज हमारे अंदर (मन मे) विद्यमान है वही चीज बाहर दिखती है।
हमारा मस्तिष्क इस ब्रह्मांड मस्तिष्क का एक छोटा सा भाग है और हम जो कल्पना करते है ब्रह्मांड की शक्तियां वो सब हमारे समक्ष रखने का प्रयास करती हैं। इसे कुछ लोगों ने " law of attraction" का नाम भी दिया है। हमारा मस्तिष्क हमेशा कुछ न कुछ सोचता ही रहता है। हम मन को दो भागों में बाँट सकते हैं, चेतन और अवचेतन मन। हम जो कुछ आंखों द्वारा देखते है और जो भी सोचते हैं वो सब चेतन मन द्वारा नियंत्रित होता, यह तात्कालिक प्रभाव दिखाता है। 

Law of Attraction के अपने कुछ नियम भी है। यह नियम कभी "नकारात्मक" शब्द को प्रॉसेस नही करता है। इसको एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं- माना कि आज आपको आफिस नही जाना है तो आप मन मे विचार करेंगे कि " आज मैं ऑफिस नही जाऊंगा।" लेकिन law of attraction के अनुसार आप सोच रहे हैं कि " आज मैं आफिस जाऊंगा।" यहां पर " नही" शब्द जो कि नकारात्मक है छूट गया प्रोसेस ही नही हुआ, अब आपका मन " आज मैं आफिस जाऊंगा।" वाली सारी परिस्थितियां आपके समक्ष लाएगा। 

एक पहलू इसमे और भी है कि कई बार हमें परिणाम तुरंत मिल जाते हैं और कई बार देरी से। कभी कभी हम सोच कुछ रहे हैं और मिल कुछ और जाता है। वो सकता है कि आपको जो अभी मिल रहा है वो आपकी किसी पूर्व सोच का परिणाम हो।

दुष्यंत कुमार की एक अत्यधिक प्रसिद्ध ग़ज़ल का मुखड़ा है -

'मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ, वो गजल आपको सुनाता हूँ।'

इसी बात को दूसरे शब्दों में इस तरह कहा जा सकता है कि हम जो चाहते हैं सर्वप्रथम उसी को स्वयं के लक्ष्य के रूप में स्थापित करना होता और तत्पश्चात दृढ़ संकल्प के साथ कठिन परिश्रम करते हुये अपने लक्ष्य को प्राप्त करना होता है।

प्रत्येक वर्ष जब विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं जैसे कि आईएएस, आईपीएस, आईआरएस व अन्य प्रथम श्रेणी की सेवाओं हेतु सिविल सेवा परीक्षा, मेडिकल कोर्स में प्रवेश हेतु नीट परीक्षा, आईआईटी में प्रवेश हेतु जेईई एडवांस परीक्षा व अन्य विभिन्न कड़ी प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के परिणाम प्रकाशित होते हैं तो समाचार पत्रों में टॉपर्स की फ़ोटो छपती है और उनसे उनकी सफलता का राज पूछा जाता है। लगभग सभी टॉपर्स यही कहते हैं कि उन्होंने एकाग्र चित्त होकर कड़ी मेहनत की और अपने लक्ष्य से भटके नहीं। उन्होंने जैसा चाहा, वैसे बने।

इसी प्रकार जेल में बंद हो जाने पर जब व्यक्ति अपराधियों के संपर्क में आता है तो इस बात की संभावना अधिक हो जाती है कि वह पहले से शातिर अपराधी बन कर ही जेल से बाहर आयेगा।

हमारा समाज और हमारे आसपास का माहोल हमें पीछे धकेलने वाला होता है। यहाँ तक की हमारे परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों में से अधिकतर लोग भी हमें हर बात पे टोका करते है। हम जबसे पैदा हुए है, तब से लेके लगातार कितने ही नकारात्मक बाते सुनते है। “तुम यह नही कर पाओगे, तुमसे नही होगा, वही करो जो सब करते है, यह काम मुश्किल है या असंभव है, तुम कुछ भी काम ठीक से नही कर सकते। ” ऐसे कितने ही बाते हम हमेशा सुनते आ रहे है जिससे अक्सर लोगो की आत्म-छवि ऐसा बन जाती है की वो कुछ बड़ा सोचता ही नही, इसीलिए इन्सान सोचता है की जैसा सब लोग जिंदगी बिता रहे है हमें भी बिताना चाहिए।

रोकने वाले और टोकने वाले बहुत है यहाँ। अधिकतर लोगो को किसी की सफलता देखना पसंद नही है। हमारी सोच और हमारा व्यक्तित्व निर्धारण में हमारे माहोल का बहुत बड़ा योगदान होता है। और हमसे से ज्यादातर लोग ऐसे ही माहोल में पैदा होते है और बड़े होते है। इसलिए उनके जैसा ही उनके भीड़ का हिस्सा बन जाते है।

बड़ी सोच कैसे विकसित करे? और इसका इस्तेमाल वो सब पाने के लिए कैसे करे जो हम पाना चाहते है?
इन्सान होने का हमें सबसे बड़ा फायदा ये है, की हमारी सोच को हम कभी भी अपने हिसाब से बदल सकते है। अगर आप भी भीड़ से निकल कर सफलताओ को पाना चाहते है, एक खुशहाल जीवन चाहते है, तो अपनी सोच को बड़ा कीजिये अपना नजरियाँ सफलताओ वाली कीजिये।

दोस्तों हमारी सोच  इतनी शक्तिशाली होती है कि अगर इसके साथ लक्ष्य, लगन और प्रबल इच्छा जुड़ जाये तो आप दुनिया की कोई भी वस्तु हासिल कर सकते हैं। आपकी सोच ही आपको सफलता की मंजिल तक ले जाती है। यदि आप के पास सोच नहीं है तो समझ लीजिये आप के पास कुछ नहीं है। सोच के बिना आप उस चीज को हासिल नहीं कर सकते हैं जिसे आप पाना चाहते है।

जीवन में सफलता पाने का सबसे सरल तरीका है अपनी सोच को सफलता की दिशा में मोड़ना। इसलिए इस बारे में सोचना शुरू करिए, ईश्वर  की दी हुई इस अनोखी  शक्ति को  बर्बाद मत कीजिये , अपने सपनो को अपनी सोच की शक्ति से सच कर दिखाइए !

उदाहरण : अगर अगर आपने सोच लिया की आपके पास बहुत पैसा है तो सचमुच आपके पास बहुत पैसा हो जाता है, यदि आप सोचते हैं कि मैं हमेशा गरीबी में ही जीता रह जाऊंगा, तो ये भी सच हो जाता है .शायद सुनने में अजीब लगे पर ये एक सार्वभौमिक सत्य है. यानी हम अपनी सोच के दम पर जो चाहे वो बन सकते हैं। 

क्या होता है जब लोगों का इरादा,सोच,विचार,उद्देश्य conflict करती है ,जैसे कि दो लोग एक ही promotion के बारे में सोचते हैं , जबकि एक ही जगह खाली है ? क्या छोटे बच्चों  या जानवरों की भी intentions काम करती है?

क्या आप जानते हैं, की आप वो सब कुछ कर सकते हो जो आप सोचते हो । मेरा मन ही सब कुछ है, मेरा मन ही मेरा सबसे अच्छा दोस्त  है, ओर सबसे बड़ा शत्रु  ।

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कर्म सिर्फ जो हम करते हैं उसको ही सिर्फ कर्म कहते हैं But कर्म Action ,words, Feelings, ओर Thoughts से शुरू होता है, आप क्या ओर कैसा सोचते हो ये भी कर्म ही है। आप आम🥭 का पेड़ लगाओगे तो तो आम ही मिलेगा ओर केले 🍌 का लगाओगे तो केला ही मिलेगा।

हम वही बनते है जो हम सोचते है। जिस तरह कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ बोलता या काम करता है, तो उसे कष्ट ही मिलता है।

क्या कभी आपने सोचा है की हमारे विचार हमें दिशा देते हैं। जानिए अपनी सोच की क्षमता और महत्वसोचूराम ने सोचों में आपना जीवन बिता दिया। काम कुछ नहीं किया, पर इतना सोचा की उसकी कुछ करने की हिम्मत ही नहीं रही। उसने अपनी प्रेरणा के स्त्रोत को सही से इस्तेमाल नहीं किया।

हम कोई काम करें या न करें। सोचने, विचारने का काम हम हर समय करते रहते हैं। और एक अछी सोच कभी कभी इतनी बुरी बन जाती है की हम हैरान रह जाते है की यह बात हम क्यों सोच रहे हैं। सुबह, दुपेहर, शाम, रात और यहां तक की नींद में भी सोचते और बढ़बढ़ाते रहते हैं और जो बात हम सोचते हैं वह करते हैं और जो नहीं सोचते वह नहीं करते। क्यों?
विचार का महत्व: विचार कहाँ से आते हैं? क्या आपने कभी सोचा है?

सोचने, विचारने, चुनाव करने की क्षमता हमें परमेश्वर का वरदान है इसलिए हम कभी भी, कुछ भी सोचते हैं। इसमें कोई पाबंदी नहीं। पर क्या आप जानते हैं कि आपकी सही या गलत बातें जो आप सोचते हैं आपके जीवन को उसी दिशा मे मोड़ देती है।

यह कहावत तो आप ने सूनी ही होगी कि “आप जो अपने मन मे सोचतेे हैं आप वह बन जाते हैं।”

क्या कभी सोचा है आपने, आपके विचार मे इतनी शक्ति है कि आप अपने शरीर में ठीक हो जाएँगे या वह करने में कामयाब होंगे जो आम लोग नहीं कर पाते या आपके गलत विचार सोचने के कारण आप निराश रहेंगे, बिमार रहेंगे, जो काम करना चाहते हैं उसमें सफल नहीं हो पाएगे।

1.आगे का सोचे:

दोस्तों जो पुरानी बातें हो गयी उनके बारे में सोच के दुःख  हैं ,  उनसे अच्छी सीख लो और आगे बढ़ो। जैसे की पढ़ाई पूरी न कर पाया, कामयाबी जो नही मिली, जैसा सोचा था वैसी नौकरी नही मिली, किसी ने दिल दुखाया जो आपको परेशान कर रहा है, किसी को खो देने का दुख या अपने आने वाले कल की चिंता सताता रहता है। 

2.दिल की सोच को बदलिए: 

 माफ़ी में आपका दिल और दिमाग़ आगे बढ़  सकता है। आप बदला लेके अपने आप को और भी तोड़ देते हैं। अगर आप आगे बढ़ना चाहते हैं तो माफ़ी दे और सही राह पे चलिए।

3.चौकस रहो, कि क्या सुनते हो?:

अपने जीवन के अधिकांश समय के लिए, मैंने बस वही सोचा जो मेरे दिमाग़ में बात आयी। मेरे मन में जो कुछ था वह ज्यादातर झूठ था या शैतान बकवास बता रहा था। शैतान मेरे जीवन को नियंत्रित कर रहा था क्योंकि वह मेरे विचारों को नियंत्रित कर रहा था।

मनुष्य जैसा भी सोचता है वह संस्कार उसके सबकोन्शयस में फीड हो जाते हैं और वही संस्कार कालांतर में प्रवृति और व्यवहार का अंग बनते हैं। वो जैसा सोचता है वो वैसा पा जाता है।

हर मनुष्य प्राणी के चित्त में जन्म जन्मांतर के जो संस्कार पले हैं, वे संस्कार ही उसके व्यवहार में उभरते हैं। हम अपने आप को रागी-मोही, द्वेषी, लोभी, क्रोधी, स्त्री-पुरुष मानते हैं, यह संस्कार हमारे भीतर बने हैं और हम अपने आपको इसी अनुरूप में अनुभव करते जा रहे हैं।

उन लोगों को माफ करना आपकी तरक्की के लिए जरूरी है, जिन्होंने गलत व्यवहार से आपको दुख पहुंचाया हो।

1  . आपको किसी और से बेहतर होने की ज़रूरत नहीं है, आपको सिर्फ बेहतर होने की आवश्यकता है।

2 . जब आप एक संतरे को निचोड़ते हैं तो संतरे का रस ही बाहर निकलता है, क्योंकि उसके भीतर वही होता है। जब आप खुद का मंथन करते हैं तो वहीं बाहर आएगा, जो भीतर है।

3. आपकी प्रतिष्ठा दूसरों के हाथों में है। प्रतिष्ठा पर आप नियंत्रण नहीं कर सकते, केवल एक चीज जिसे आप नियंत्रित कर सकते हैं, वह आपका चरित्र है।

  • Welcome to जैसा सोचोगे वैसा आप बन जाओगे

दोस्तों आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? शायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे, लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये, क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थे, जिसका सपना आपने देखा था, क्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे। ऐसी सफलता, जिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को गवाना पड़ा, यदि आपकी सीढ़ी सही दीवार पर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है। 

दोस्तों जो हम सोचते हैं वही बन जाते हैं,सोच बड़ी रखो, छोटी सोच वाला व्यक्ति ही शूद्र बनता है।  

विधि 1 अपने विचारों को ढीला छोड़ दें

यह स्वीकार कर लें कि आप बहुत ज्यादा सोचते हैं.  खाना खाने की तरह ही सोचना भी ऐसा काम है जो जिन्दा रहने के लिए जरूरी है, इसलिए अगर आप जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं तो भी कई बार इस बात को समझना मुश्किल हो जाता है.  फिर भी कुछ ऐसे खतरों के संकेत हैं जिनसे ये पता चल जाता है कि आप जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं.  यहाँ उनमें से कुछ दिए गए हैं: 

किसी से सलाह लें: 

अच्छी सलाह लेने से आपको आपके परेशान कर देने वाले विचारों से  डर दूर होगा।  आपका सच्चा दोस्त  आपकी परेशानियों को कम कर सकता है, आपको बेहतर महसूस करा सकता है, और आपको इस बात का एहसास भी दिला सकता है कि आप ज्यादा सोच-सोच कर अपना बहुत अधिक समय नष्ट कर रहे हैं। 

विधि 2 अपने विचारों पर नियंत्रण पाना

ऐसी चीजों की एक प्रैक्टिकल लिस्ट बनाइये जिनसे आपको परेशानी है। चाहे आप किसी पेपर पर लिख रहे हों या कंप्यूटर पर, आपको सबसे पहले अपनी किसी समस्या को परिभाषित करना चाहिए और उसके बाद अपने विकल्पों को लिखना चाहिए, और फिर हर विकल्प के लिए अच्छे और बुरे पहलुओं की सूची बनानी चाहिए। 

जो बातें आपको परेशान कर रही हैं, उन्हें नोट करके रखने के लिए एक डायरी रखें। ऐसे विचार जो ज्यादा समय तक आपके दिमाग में बने रहते हैं उनपर ध्यान देने की बजाय हर दिन उन सभी बातों को लिखें जो आपके दिमाग में आती हैं।क्योंकि उनका हल निकालना आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है.

हफ्ते में कम-से-कम कुछ बार अपनी डायरी में लिखने की आदत जरूर डालें क्योंकि ऐसा करने से आप “सोचने का समय निकालने की आदत को अपनी जीवनशैली का अंश बना सकेंगे। 

जो  काम आपको पूरा करना है, किसी खास दिन उन सब कामों की सूची बनायें।  अगर “विचारमग्न रहना” आपकी प्राथमिकताओं की सूची में एक काम ना हो तो  ऐसे  विचारों को व्यवस्थित करने का सबसे तेज तरीका है उन्हें क्रियात्मक रूप देना। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि पिछले कुछ दिनों से आपको पर्याप्त नींद नहीं मिली है तो इस बारे में परेशान होने की बजाय अपनी इस जरूरत को तुरंत पूरा करने की कोशिश करें।

यह सूची प्रैक्टिकल हो सकती है और इसमें बड़े-बड़े काम भी शामिल हो सकते हैं, जैसे: “अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना”, “अपनेआप को फिट बनाने के लिए ज्यादा व्यायाम करना” इत्यादि।

विधि 3 वर्तमान समय में रहना

अगर आप इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आप ऑफिस में या स्कूल में दूसरों से पीछे हो रहे हैं तो ऐसे सभी कामों की एक सूची बनायें जिन्हें करके आप सफल हो सकते हैं। 

अगर सोचना आपको पसंद है, और “अगर बहुत ज्यादा भी पसंद है तो क्या हुआ.....”, आप बस उन्ही कामों को करने की कोशिश करें जो आप आसानी से कर सकते हों.

कोई नया शौक पालें: 

अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर बिलकुल नयी तरह की चीजों के विषय में जानने की भी कोशिश करें। चाहे आपका कोई भी नया शौक हो, कोई नया शौक हो तो आप वर्तमान समय में जीना सीख जाते हैं और अपनी कला, संगीत, या जो भी आपका शौक हो उसपर ध्यान देने लगते हैं. इनमें से कुछ आजमा के देखें।

डांस: 

डांस करने के कई तरीके हैं – आप अपने कमरे में अकेले डांस कर सकते हैं, या डांस क्लास ज्वाइन कर सकते हैं जैसे जैज़, साल्सा, स्विंग डांस इत्यादि क्योंकि  आप अच्छा डांस कर पाने के लिए डांस मूव्स पर ध्यान देंगे ही और स्वाभाविक रूप से परेशान करनेवाले विचारों से आपका ध्यान हट जाएगा।

प्रकृति के नजदीक  जाएँ:

ऐसा  करने से आपको वर्तमान पल में जीने का मतलब समझ में आयेगा, आप प्रकृति को गले लगा सकेंगे, और आप एक ख़ुशी का एहसास करोगे। 

अगर यह सब बहुत ज्यादा काम लगे तो कम-से-कम घर से बाहर ही निकल लें. बाहर निकलने पर जब आपको सूरज की रौशनी मिलेगी तो आप ज्यादा स्वस्थ, और खुश महसूस करेंगे, और इसके साथ-साथ स्वाभाविक रूप से आपके सोचने-विचारने में भी कमी आएगी |

ज्यादा पढ़ें: 

दूसरे लोगों के विचारों पर ध्यान देने से वास्तविक ज्ञान तो मिलेगा ही, इसके साथ-साथ अपने विषय में बहुत ज्यादा सोचने की आदत से छुटकारा भी मिलेगा। जिन महान लोगों की जीवनियाँ पढने से प्रेरणा मिलती है, उन कर्मठ लोगों की जीवनियाँ जरूर पढ़ें क्योंकि इससे आपको ये समझ आ जाएगा कि हर महान विचार के पीछे उतना ही महान काम भी है। 

कृतज्ञता की सूची भी बनायें: 

हर दिन कम-से-कम 5 ऐसी चीजों की भी सूची बनायें जिनके लिए आप ईश्वर या किसी व्यक्ति के कृतज्ञ हैं। ऐसा करने से आप विचारों की बजाय लोगों और चीजों पर ज्यादा ध्यान देंगे। अगर आप ऐसा हर दिन करने में सक्षम नहीं हैं तो कम-से-कम सप्ताह में एक बार जरूर करें।

अच्छे संगीत की प्रशंसा जरूर करें: 

अगर आप किसी शानदार गीत को सुनते हैं तो आपके दिमाग के बाहर जो खूबसूरत दुनिया है, आप उससे जुड़ जाते हैं. अच्छा संगीत सुनने के लिए आप किसी कंसर्ट में जा सकते हैं, अपनी कार में कोई पुरानी सीडी चला सकते हैं, या कोई और तरीका अपना सकते हैं. अपनी आँखें बंद करें, संगीत के स्वरों में डूब जाएँ और वर्तमान पल को जी लें।

जरूरी नहीं है कि आप शास्त्रीय संगीत, किसी प्रसिद्ध संगीतकार का संगीत, या कोई अर्थपूर्ण संगीत ही सुनें | आप कोई भी ऐसा संगीत सुन सकते हैं जिसे सुनकर आप अच्छा महसूस अनुभव करते हो। 

बहुत हँसें: 

दोस्तों आपको कभी कभी ऐसे लोगो के पास भी जाना चाहिए जो खुश रहते है। कोई कॉमेडी movie  भी देखे और यूट्यूब  पर हँसाने वाले विडियो देखें। ऐसा कोई भी काम जिसे करके आप हल्का महसूस करते हों और आपके दिमाग में चलते रहनेवाले विचारों से आपका ध्यान हट जाता हो, जरूर करें | आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हँसी की बहुत बड़ी भूमिका है, इस बात को ध्यान में रखें।

सलाह 

  • सोचना एक प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया के फलस्वरूप आप अच्छे या बुरे मंसूबे बना सकते हैं।अगर आप अच्छा इंसान बन के रहना चाहते हैं तो इस प्रक्रिया का उपयोग सिर्फ अच्छे इरादों के लिए करें। 
  • इस बात को ध्यान में रखें कि आप अकेले ही नहीं हैं जो सोचते रहते हैं।  आपके जैसे और भी लोग हैं जो सोचते हैं। 
  • जानवरों के साथ खेलें।  अपने विचारों की दुनिया से बाहर निकलने का एक अच्छा तरीका यह भी है कि आप जानवरों के साथ खेलें।
  • आपका दिमाग सूचना का संचार असरदार तरीके से कर सके, इसके लिए आप उदासीन बनें।  जब हार्मोनल बदलाव और एड्रेनालाईन फ्लो धीमी गति से हो तब दिमाग और एक्शन प्रोसेसर सबसे ज्यादा असरदार तरीके से काम करते हैं। 
  • गहरी साँस लें: 5-10 गहरी साँसें लें और उनपर ध्यान दें | ऐसा करने से आप अपने दिमाग को नियंत्रित कर सकेंगे। 
  • विश्वास करे की आप सफल हो सकते है और आप सफल होंगे।
  • असफलता की बीमारी का इलाज करे।
  • आत्मविश्वास जगाये और डर को दूर भगाये।
  • रचनात्मक तरीके से कैसे सोचे और सपने देखे।
  • अपने दृष्टिकोण को अपना सहयोगी बनाये।
  • कर्मठ बनने की आदत डाले।
  • हार को किस तरह जीत में बदले।
  • लीडर की तरह कैसे सोचे।

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धन्यवाद 


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