दोस्तों हमारा दिमाग बहुत चंचल होता है।जब भी हम फालतू बैठते है तो हमारे दिमाग में बहुत सारी बातें घूमती हैं। और विशेष तौर पर जब एक विद्यार्थी पढ़ने के लिए बैठता है तो उसका दिमाग ईधर उधर की बातों में उलझ जाता है जिससे उसे परेशानी होती हैं,उसका समय बरबाद हो जाता है तो मैं उनके लिए कुछ मशवरा देना चाहती हूं जब भी आप पढ़ने के लिए बैठे तो अपने अनुकूल स्थान पर सभी समाग्री जिसकी पढ़ाई करनी हैं उसे लेकर बैठे, बार बार न उठे। गहरी सांस ले बीस मिनट के अंतराल पर आंखे एक दो बार झपकाए और अपने सेलेब्स के अनुसार अपना लक्ष्य निर्धारित करे, लक्ष्य की पूर्ति होने पर ही उठे। अब मै एक सामान्य आदमी की बात करती हूं तो हमे दिमाग की शांत रखने के लिए प्रातः भ्रमण करना चाहिए।अनुलोम विलोम प्राणायाम करना चाहिए भस्त्रिका प्राणायाम,भ्रामरी , ,ओंकार प्राणायाम का अभ्यास करने से दिमाग शांत रहता है मेडीटेशन करने से दिमाग शांत रहता हैं।दिमाग को भी आराम की जरूरत होती हैं। हमें अच्छे पढ़े लिखे सुशील व्यक्ति से संपर्क बनाना चाहिए जो हमारे मानसिक विकास में हमारी मदद करें जो हमें हमारे दिमाग में उठे हुए तरंग को शांत करने में सहायक हो। जब भी दिमाग अशांत हो तो सकारात्मक बातें सोचे। कुछ रचनात्मक कार्य करने की कोशिश करें।कभी मन पसन्द जगह पर घूमने चले जाएं। कोई अच्छी मनोरंजक फिल्म देखे। कुछ समय अपने लिए बिताए।

Welcome to अपने MIND को शांत कैसे करे?


मान लीजिए कि दिमाग एक घोड़ा है। घोड़े का चलना एवं भागना एक समस्या नहीं है। घोड़े का अंधाधुन भागना एक समस्या है, जिस वजह से घुड़सवार घोड़े से गिरकर चोट खा सकता है। जब तक गिरेगा नहीं, तब तक खुद को घोड़े से गिरने से बचाने के लिए परेशान रहेगा।

शांति शब्द आते ही हमारे दिमाग़ में तस्वीर बनती है -
आँखें बंद कर बैठकर ध्यान लगाने की, जिसे मैडिटेशन भी कहते हैं।अक्सर शांति पाने का उपाय भी यही बताया जाता है।लेकिन होता ये है कि इस तरह मैडिटेशन करते वक़्त भी दिमाग में विचारों की उथल-पुथल लगी रहती है।पंद्रह मिनट मौन बैठना भी एक काम के जैसा हो जाता है।फिर भी अगर अपनी साँसों के चलने पर ध्यान केंद्रित कर किसी तरह विचारों को कुछ देर रोक भी लिया, तो पंद्रह मिनट के मैडिटेशन के बाद दिन की शुरुआत हो जाती है। और फिर से वही आपा-धापी। ट्रैफिक, भीड़, स्कूल-कॉलेज के इम्तिहान, बेरोज़गारी, नौकरीपेशा लोगों का दफ़्तर, काम का दबाव, किश्तें, खुद का बिज़नेस, घर के झगड़े, प्यार-मुहब्बत में लड़ाई, सफलता रुपया प्रसिद्धि आदि पाने की चाह, ईर्ष्या, अशांति। लीजिए, सारा गुड़ गोबर हो गया।ये तो बस ऐसा हुआ कि सुबह के वक़्त घोड़ा नदी किनारे बैठकर पंद्रह मिनट के लिए सुस्ता लिया। और फिर लगा पूरे दिन बदहवासी में अंधाधुन भागने।

दोस्तों समस्या यह है कि सफलता की बात हो, वजन कम करना हो या शांति पानी हो, आप कोई शॉर्टकट चाहते हैं।

यक़ीन मानिए कि समाधान तो आपको हर बात का पता है। लेकिन वह समाधान आपको मुश्किल लगता है। इसलिए आप सोचते हैं कि कोई मुझे जादुई नुस्खा बता दे।अगर कोई आपको ईमानदारी से कहे कि वजन कम करने के लिएसमय से सोना और उठना शुरू करो,हर रोज़ सुबह कसरत करो,शराब कम अथवा बंद करो,बाहर का खाना बंद करो,पानी पियो, फल और सब्ज़ी खाओ,सुबह का नाश्ता अच्छे से करो,रात को डिनर कम खाओ और सोने से दो घंटे पहले खाओ,तो आप कहेंगे कि यह सब तो मैं पहले से ही जानता हूँ।मैं तो कुछ ऐसा जानना चाहता था, जो मुझे ना पता हो। यही सब बताने के लिए मैं आपको रुपए क्यों दूँ? मुझे तो कोई जादुई नुस्खा चाहिए, जिससे मैं फटाफट पतला हो जाऊँ और मुझे केक-पेस्ट्री, कोल्ड-ड्रिंक, पिज़्ज़ा खाना भी बंद ना करना पड़े। मैं तो ऐसी भेड़ हूँ, जो बचपन से हरेक काम किसी के निर्देश देने पर करता आया है। खुद से कुछ कैसे करूँ?

आसान शॉर्टकट, आपकी अधीरता और भेड़ की तरह किसी के हाँकने पर चलने की आदत के चक्कर में खड़ा हो जाता है करोड़ों-अरबों का व्यापार।हमारे पास आइए। पाँच दिन में वजन घटाइए। हर कोई कहता है कि उनके पास कोई रहस्य है।कोई आपको अफ्रीका का कोई दुर्लभ फल बेचता है, तो कोई हरी कॉफ़ी बेचता है।
कोई आपको पेट पर लगाने वाली बेल्ट चिपका देता है।कोई प्रोटीन पाउडर, कोई फिटनेस सेंटर की मैम्बरशिप, तो कोई डाइट चार्ट बेचता है। वह भी “चीट-डे” यानि पेस्ट्री खाने वाले दिन के साथ।

शांति की खोज भी इससे कुछ ज़्यादा अलग नहीं है।कोई बाबा कहता है कि बस हरी चटनी के साथ समोसा खाओ, शांति मिल जाएगी। लोग ऐसी वाहियात बात पर भी यक़ीन कर लेते हैं। कहते हैं कि अरे वाह, बाबा ने तो बहुत अच्छा तरीका बता दिया। पर समोसा खाने तक ख़ुशी रहती है। उसके बाद वही अशांति।
जाने कितनी किताबों की लाखों-करोड़ों प्रतियाँ बिक गई। जी हाँ, इस किताब में छुपा है शांति पाने का रहस्य। मन की ऊर्जा संचारित करो, ऊर्जा क्षेत्र, चेतन-अवचेतन, अपने अंदर झाँको, किस तरह झाँको, कर्म जिसे अब कर्मा कहा जाने लगा है, माया-योगमाया, ऐसी बहुत सी रहस्यमयी बातों को आप विस्मय से पढ़ते रहते हैं। फिर अंत में क्वोरा पर सवाल पूछते हैं कि शांति कैसे मिलेगी।
कोई कहता है कि हमारे शिविर में चले आओ। पाँच दिन में शांति पाओ।वहाँ आपको जबरदस्ती सुबह उठाया जाता है। मुफ्त की चीज़ की कद्र नहीं होती। पर आपने रुपए दिए हैं, और वहाँ आप उनकी जगह पर हैं, इसलिए आप सुबह उठ जाते हैं।प्राकृतिक सौंदर्य से महकते हुए आश्रम में आपको सुबह-शाम मैडिटेशन करवाया जाता है।खुली हवा में आपकी कसरत करवाई जाती है।आपके साथ सामान्यतयः वहाँ कोई दोस्त अथवा परिजन भी नहीं होता। आप एकांत में हैं। आपके फ़ोन को भी आपसे दूर रखा जाता है, ताकि बाहर के जीवन की कोई भी चिंता आप तक ना पहुँचें।आपको सात्विक खाना खिलाया जाता है। आपको उन आश्रम वालों के खुले-खुले कपड़े पहनाए जाते हैं।कुछ जगह आपसे नाचने को भी कहा जाता है, और आप मस्ती में नाचते हैं।
आप कहते हैं कि ये तो अद्भुत है। मैं कितने सालों बाद इतना शांत महसूस कर रहा हूँ। लेकिन आप वापस आते हैं, और फिर से वही चिंताएँ और अशांति का जंजाल।पाँच दिन में शांति पाओ, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि केवल पाँच दिन के लिए शांति पाओ।आपको आश्रम की याद आती है। मौका मिलते ही फिर से वहाँ जाने के लिए सोचते हैं। जब तक नहीं जा सकते, तब तक आप बाबा जी के ऑडियो-वीडियो से काम चलाते हैं। पर अशांति नहीं मिटती।

आपको बार-बार यह समझाया जाता है कि शांति पाना एक बेहद जटिल विषय है। इसके लिए आपको उनकी जरुरत है।लेकिन ज़रा बच्चों को देखिए। उनमें चंचलता है, परंतु अशांति नहीं। आप भी तो कभी इसी तरह शांत थे। शांति आपके स्वभाव में थी।अब आप कहेंगे कि बचपन में तो जीवन की ये सब समस्याएँ नहीं होती। इस तरह आपने मान लिया है कि जीवन में अशांति होनी ही है। मुझे किसी से शांति पाने का उपाय चाहिए।परंतु कुछ भी तो ऐसा नहीं जो आप नहीं जानते, या आपके लिए करना संभव नहीं। आपको यक़ीन नहीं आता तो शांति का नुस्खा नीचे संक्षिप्त कर रहा हूँ। आप खुद ही देख लीजिए -

क्या हमें दिखावा करना चाहिए? बताइए। जानते हैं ना कि हमें दिखावा नहीं करना चाहिए।लेकिन दस हज़ार रुपए के फ़ोन के बजाए आप अस्सी हज़ार रुपए का फ़ोन लेते हैं। फिर हर मिनट यह चिंता कि इतना महँगा फ़ोन कहीं गुम ना हो जाए।अगले साल कंपनी फ़ोन का नया मॉडल निकालती है। फिर से आप नया फ़ोन खरीदना चाहते हैं, जबकि आपका फ़ोन सही हालत में है। इससे देख सकते हैं कि शांति-अशांति सस्ते या महंगे फ़ोन में नहीं, आपके अंदर है।चार लाख रुपए में भी कार आ सकती है, और वह भी बेहतर माईलेज वाली। लेकिन आप बारह लाख रुपए की कार खरीदते हैं।अगर आपके पास रुपया है, तब तो फिर भी ठीक है। लेकिन जरुरत के बजाए दिखावे के लिए लोन लेना बेवकूफ़ी नहीं तो और क्या है।किसी भी मस्ती में आप खुद को सरोबार होने ही नहीं देते। क्योंकि आपके हाथ सेल्फी लेने के लिए मचलते रहते हैं ताकि आप फेसबुक पर दिखावा कर सकें।दिखावा करने के आपको इतने सारे माध्यम उपलब्ध करा दिए गए हैं। 

आपके फ़ोन में कैमरा है। फ़ोन में ही इंटरनेट - व्हाट्सप्प स्टेटस, फेसबुक, इंस्टाग्राम।दिखावा जितना ज़्यादा होगा, उतना ही ज़्यादा सामान बिकेगा। महँगा फ़ोन, महँगी कार। जल्दी-जल्दी नए कपड़े खरीदना। मेरी इस शर्ट-जींस में फोटो तो सब फेसबुक पर देख चुके हैं। इसलिए अगले पार्टी-फंक्शन के लिए मुझे नए कपड़े लेने होंगे। गोवा जाने के लिए नए कपड़े लेने होंगे। पहले खरीदारी एक जरुरत थी। अब एक रुचि (हॉब्बी) बन गई है।पहले कुछ लोगों को दिखावटी कहा जाता था। अब पूरी दुनिया ऐसी हो गई है। अब दिखावे को स्वैग कहा जाने लगा है। दिखावा करना अफ़ीम के जैसा हो गया है।

बुरा मत मानिएगा, पर सच्चाई यह है कि फेसबुक पर जिन लोगों को आप अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह, यात्रा, दफ़्तर, पार्टी इत्यादि हर बात की फोटो दिखा रहे हैं, उन्हें आपकी ज़िंदगी से या तस्वीरों से कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता। यक़ीन नहीं आता तो आप फेसबुक छोड़कर देख लीजिए, कि कितने लोग आपसे फेसबुक पर फिर से आने के लिए आग्रह करते हैं।किसी ने आपको अशांति बेच दी है। और आपने अशांति को खरीद भी लिया है। शांत व्यक्ति को जीवन में वे सब भौतिक वस्तुएँ चाहिए ही नहीं। आपको विज्ञापनों में बताया गया कि आपके पास किसी चीज़ की कमी है। इस तरह आप चीज़ें खरीदते रहते हैं। फिर अशांति में अब आप शांति खरीदना चाहते हैं।

किसी ख़ास वास्तु के लिए अलग ही शौक होना समझ में आता है। परंतु उसके अलावा बाकी जीवन में 'सादा जीवन, उच्च विचार' अपनाएँ। आजकल ज़्यादातर लोग 'ऊँचा जीवन, तुच्छ विचार' अपना रहे हैं।
क्या हमें किसी से ईर्ष्या करनी चाहिए? क्या किसी से तुलना करनी चाहिए?आप जानते हैं कि ऐसा नहीं करना चाहिए। परंतु फिर भी ऐसा करते हैं, और अपने मन को व्याकुल कर लेते हैं, किसी दूसरे की ख़ुशी से भला आपको क्यों दुखी होना चाहिए? लेकिन आपने अशांति का एक फालतू कारण अपने जीवन में जोड़ लिया है।
अपने से बेहतर लोगों से प्रेरणा लीजिए। उनसे कुछ सीखिए। ईर्ष्या करने से और किसी की चुगली करने से कुछ फायदा नहीं होगा।

ईर्ष्या को तो जलन का नाम दिया गया है। कोई और आपसे जलता है, तो उसे जलने दें। मुश्किल है परंतु आप उनसे ईर्ष्या मत कीजिए। यही तो वे चाहते हैं कि आप उनसे जल जाएँ। आप अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें।
क्या हमें स्वार्थी होना चाहिए? दूसरों की मदद कर के अच्छा लगता है या बुरा? कहते हैं कि आजकल भलाई का ज़माना नहीं रहा। क्या वाकई? कोई आपके लिए कुछ भला करे तो क्या आपको अच्छा नहीं लगता? लगता है ना। इसलिए लोगों की मदद करें। दूसरों को आपकी मदद करने दें।
स्वार्थ में आप एक क्षणिक ख़ुशी पा सकते हैं। परंतु ध्यान रखिए कि वह असली ख़ुशी नहीं है। उस ख़ुशी में कोई शांति नहीं है।

ईर्ष्या और स्वार्थ उस जंक फ़ूड की तरह ही है, जो उस क्षण तो आपको अच्छे लगते हैं, परंतु बाद में आपको बीमार ही करते हैं। अच्छा खाना खाने की आदत डालेंगे, तब वह भी स्वादिष्ट लगने लगेगा। अच्छाई में अच्छा महसूस करेंगे आप। आपके मन-रुपी घोड़े को अच्छे खाने की जरुरत है, नहीं तो बीमार हो जाएगा।
ईमानदार लकड़हारा, स्वार्थी दानव, सिंड्रेला जैसी वे बचपन की कहानियाँ बकवास नहीं थी। वे अमल में लाने के लिए हैं। जब बच्चों को वे कहानी सुना रहे हैं, तो अपने मन में यह कहना छोड़ दीजिए कि बेटा, अभी तू बच्चा है। अभी तुझे नहीं पता कि दुनिया कितनी कमीनी है। दुनिया के बदलने का इंतज़ार ना करते हुए अपने कमीनेपन को पहले हटाइए। ऐसा करते हुए इसे किसी और पर एहसान ना समझें। याद रखें कि यह आपकी शांति के लिए हैं।

बहुत से जवाबों में पहले भी कह चुका हूँ कि भावुकता की वजह से आपका नुक्सान हो सकता है, परंतु भावुकता ख़त्म होना सबसे बड़ा नुक्सान है। नकली क्षणिक ख़ुशी तो आप पा लेंगे, परंतु भावुकता के बिना प्रेम, ख़ुशी, शांति जैसे कोमल भावों से वंचित रह जाएँगे।पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका, माँ-बाप, भाई-बहन, दोस्त, किसी भी रिश्ते में लड़ाई हो, तो आपको क्या करना चाहिए?

अहंकारी बनकर अपनी गलती ना देखें, बहस करें, दूसरे को माफ़ी माँगने के लिए कहते रहें, बहुत सी शर्तें लगा दें? क्या हमें ऐसा ऐसा करना चाहिए? या अहंकार  को मिटाकर गले लगा लेना चाहिए क्योंकि वे हैं तो आपके अपने ही। आज नहीं तो कल उन्हें अपनी गलती का एहसास हो जाएगा। या हो सकता है कि गलती आपकी ही हो और आपको एहसास हो जाए। व्यापार शुरू करते हुए बहुत सारा कर्ज़ा लेकर अचानक से करोड़पति बनने का सोचना चाहिए, या पैर जमाते हुए अपने वफादार ग्राहक बनाते हुए धीरे लेकिन स्थिरता से व्यापार को बड़ा करना चाहिए?

जोख़िम उठाना तो व्यापार का हिस्सा है, लेकिन यह जायज़ा कर लें कि कितना जोख़िम उठा रहे हैं। एक बार गिर गए, तो दोबारा उठने के संसाधन और हिम्मत तो होगी ना। या सब कुछ ताक पर रखकर सड़क पर आ जाने का जोखिम ले लिया है?काम कर रहे हैं तो निष्काम भाव से करें।जैसा कि श्री कृष्ण ने कहा है कि कर्म करो, फल की इच्छा मत करो।

इस बात पर ध्यान दें कि काम उत्तमता से हो, जिसे देखकर लोग तारीफ करें या नहीं, लेकिन आपको लगे कि मैंने कुछ सार्थक किया। प्रमोशन मिले, तारीफ मिले, इनाम मिले, जो मिल जाए, एक बोनस है।कुछ भी करते हुए इधर-उधर की बातें सोचनी चाहिए या उसी काम पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए?यही है ध्यान लगाना या मैडिटेशन। प्रत्येक क्षण में डूब जाना।सुबह आँखें बंद कर के पंद्रह मिनट वाला मैडिटेशन तो कीजिए ही, परंतु यह दिनभर का मैडिटेशन ज़्यादा आवश्यक है।खाना खा रहे हैं, तो चबा-चबा कर धीरे-धीरे खाना खाएँ। फिल्म देख रहे हैं तो तल्लीन होकर सिर्फ फिल्म देखिए। पढ़ाई कर रहे हैं तो रटने के बजाए हरेक सूत्र को समझकर पढ़ें। ज्ञान के लिए पढ़ेंगे तो मज़ा भी आएगा, और इम्तिहान में अच्छे अंक भी।

फ़ोन नाम का एटम बम जो आप जेब में लिए घूम रहे हैं, उससे बचिए। किसी को आपसे जरूरी काम होगा तो फ़ोन कर लेगा। इसलिए बार बार फ़ोन में अधिसूचनाएँ देखना बंद कीजिए। यह आपको ध्यान केंद्रित करने से रोकता है, और आपको सर्वथा विचलित रखता है। बस-मैट्रो-रेलगाड़ी में खाली होते हुए कुछ करना है तो कहानियों की किताब पढ़िए।

जो काम आपको अच्छा लगता है, क्या रूपये और प्रसिद्धि के लिए ही उसे करना चाहिए? और वह काम करियर ना बन पाए, तो क्या उसे छोड़ देना चाहिए?या वह काम तब भी इसलिए करना चाहिए क्योंकि वह काम करने में आपको मज़ा आता हैजो हमारे पास है, क्या हमें उसमें संतुष्ट रहना चाहिए, या हर वक़्त शिकायती लहज़े में अपनी ज़िंदगी को लेकर रोते रहना चाहिए?क्या दूसरों की तारीफ करनी चाहिए या खुद के साथ औरों में भी कमी निकालनी चाहिए?परिवार के साथ कभी घूमने निकलें, तो क्या हमेशा मॉल में जंक फ़ूड खाने के लिए जाना चाहिए, या कभी किसी गाँव में, किसी झील पर या किसी सुन्दर पार्क में पिकनिक करनी चाहिए?

बच्चे हर काम को फायदे-नुक्सान की कसौटी पर नहीं आँकते। उनका जो मन होता है, वे मज़े के लिए करते हैं। उनकी भले ही आपस में खेलते हुए लड़ाई हो जाए, परंतु उनके दिल में नफ़रत नहीं होती। बच्चों में अहंकार नहीं होता। आज लड़ लिए, और कल फिर से बातें शुरू। बच्चे हर बात में दिखावा नहीं करते। बच्चे हर काम में ध्यान केंद्रित करते हैं। इसलिए बच्चे शांत और खुश होते हैं।

धीरे-धीरे माँ-बाप बच्चों से यह सब सीखने के बजाए बच्चों को अपने जैसा बना देते हैं। क्लास में प्रथम आओ। औरों के इम्तिहान में अंकों से तुलना करो। जो परीक्षा में आना है, वही पढ़ो। अपने से गरीब बच्चों से ज़्यादा बात मत करो। यह वाकई एक दुर्भाग्य है।

जब घोड़ा प्रशिक्षित होता है, तो उसके तेज़ भागने पर भी घुड़सवार को डर नहीं लगता। ठंडी-ठंडी हवा का चेहरे पर स्पर्श होता है, और यह आनंदमयी होता है। बीच-बीच में घोड़े का धीरे चलना और विश्राम करना भी आवश्यक है। खेल-कूद और मनोरंजन के लिए भी समय निकालें। वीडियो गेम खेलने जैसे ऊबकाऊ काम बंद करें। कुछ सृजनात्मक शौक उत्पन्न करें।

बहुत अच्छा सवाल है, क्योंकि जब तक अशांति इस स्तर तक नहीं पहुँच जाती कि वह एक बीमारी बन जाए, तब तक ज़्यादातर लोगों को अपनी अशांति का आभास नहीं होता।जब पूर्ण रूप से आप शांत हो जाएँगे, उसका भी आभास आपको हो जाएगा। लेकिन बीमारी के स्तर की अशांति और पूर्ण शांति के बीच का जो फासला है, उसके लिए कोई तो तरीका होना चाहिए अपनी अशांति की मात्रा को मापने का।

चारों तरफ ज़्यादातर लोग भी उतने ही अशांत हैं। इसलिए लोगों का अपनी अशांति को नॉर्मल, यानि पर्याप्त शांति मान लेना स्वाभाविक है। लोगों ने मान लिया है कि इस दुनिया में रहेंगे तो इतनी अशांति तो रहेगी ही। उसके अलावा देखा जाए तो मैं शांत हूँ।

लेकिन यह सच नहीं है। शांत होना मुमकिन है, और जब मुमकिन है तो शांत क्यों ना हुआ जाए। शांति किस तरह पाएँ. अभी इस सवाल पर आते हैं कि अपनी शान्ति या अशांति का जायज़ा कैसे किया जाए। जब हम जान पाएँगे कि समस्या है, और समस्या कितनी है, तभी तो हम उसके समाधान की तरफ बढ़ेंगे।


जो अंदर से अशांत है, उसके लिए बाहर से शांत रहना भी मुश्किल होता है।एक छटपटाहट उसको घेरे रहती है।
हर वक़्त कुछ ना कुछ करना उसके लिए मजबूरी हो जाती है।कुछ लोग निरंतर बोलते रहते हैं।
कुछ लोग फ़ोन पर कुछ ना कुछ करते रहते हैं,कुछ लोगों को फिजेट स्पिनर का इस्तेमाल करना पड़ता है।
तो वहीं कुछ लोग माथे पर त्योरियाँ डाले हुए कुछ सोचते रहते हैं। किसी एक दिशा में नहीं, बस यूँ ही दिमाग इधर-उधर उलझा रहता है।

ध्यान अवधि के कम होने के कुछ और भी कारण हो सकते हैं, परंतु दिमाग़ की अशांति इसका एक मुख्य कारण है। माइक्रोसॉफ्ट के एक शोध के अनुसार आम व्यक्ति की औसतन ध्यान अवधि मात्र 8 सेकंड रह गई है।

कहानियाँ और उपन्यास पढ़ना अब असाधारण होता जा रहा है।यूट्यूब देखते हुए भी यह साफ़तौर पर झलकता है। एक तो फोन का स्क्रीन वैसे ही छोटा होता है। ऊपर से लोग कोई वीडियो देखते हुए मोबाइल फ़ोन को घुमाकर "फुल स्क्रीन" भी नहीं करते। क्यों? क्योंकि वीडियो देखते हुए ही लोग साथ के साथ कमेंट्स (टिप्पणी) पढ़ने लगते हैं।

फ़ोन पर ईयरफोन लगाकर गाने सुनते हुए लोग एक गाना ख़त्म होने से पहले ही यह ढूँढने लगते हैं कि अगला गाना कौनसा सुनना है। या फिर साथ में व्हाट्सप्प, इंस्टाग्राम या फेसबुक चलाते रहते हैं। या अशांत दिमाग इधर-उधर का कुछ-कुछ दिशाहीन सोचता रहता है। पता ही नहीं लगता कि गाना कब शुरू हुआ, और कब ख़त्म, और कितने गाने निकल गए।डी.जे. डांस फ्लोर पर नाचते हुए हर एक-दो मिनट बाद गाना बदलता रहता है।कविताएँ पढ़कर उनको समझने की कोशिश करना, खुद का कोई अर्थ निकालना अब विचलित लोगों के लिए पहाड़ जैसा काम है। एक छोटी सी कविता - खिड़कियाँ कुछ तो आजकल वैसे ही फिल्मों की पटकथा तेज़ भागती है। फिर भी बहुत से लोग फ़ोन पर फिल्म देखते हुए फिल्म को आगे बढ़ा-बढ़ाकर देखते हैं।
फिल्मों के गानों को देखिए -पहले लोगों को किसी भी गाने के सभी अंतरे याद होते थे। परंतु आज कोई भी सुपरहिट गाना ही क्यों ना हो, लोगों को मुखड़े की दो-चार पंक्तियों के अलावा आगे का गाना याद नहीं होता।
पुराने गाने पाँच से सात मिनट तक के होते थे। आजकल गाने तीन से चार मिनट के होने लगे हैं।पुराने गानों में गाना शुरू होने से पहले इंट्रो धुन होती थी। इंट्रो धुन का एक मिनट लंबा होना भी कोई अजीब बात नहीं थी। कभी-कभी ऑडियो कैसेट में गाने से पहले कुछ डॉयलोग को भी शामिल कर दिया जाता था। लेकिन अब रोमांटिक गाना हो या पार्टी गाना, गाने के बोल को जल्दी से जल्दी शुरू कर देना एक फॉर्मूला बन गया है।
"ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है" या "वक़्त ने किया क्या हसीं सितम" - इन गानों के जितनी मंद रफ़्तार आपको आजकल किसी गाने में नहीं मिलेगी। यह मंद रफ़्तार भावनाओं और बोल की गहराई के लिए सहायक होती थी, लेकिन अब गहराई होती ही कहाँ है।

पुराने गानों में हरेक अंतरे की पहली दो पंक्तियों को दोहराना भी बहुत प्रचलित था, ताकि लोग बोल पर ध्यान दे सकें। अब यह भी लगभग ख़त्म हो गया है।उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खां ने जब "मेरे रश्के-क़मर" गाया, वह सत्रह मिनट का है। आज के सुनने वालों के हिसाब से जब उनके बेटे उस्ताद राहत फ़तेह अली खां ने उसे फिल्म के लिए गाया, तो वह गाना मात्र चार मिनट का है। और यह चार मिनट का गाना भी कितने लोगों ने आखिर तक सुना होगा, आप सोच सकते हैं। क्या आपने सुना?फ़िल्मी संगीत तो धीमा होकर भी कभी इतना धीमा नहीं होता। आइए, अब क़व्वाली, ग़ज़ल और शास्त्रीय संगीत की बात करते हैं -क्या शास्त्रीय संगीत वाकई उबकाऊ होता है? जी नहीं। कभी शास्त्रीय संगीत अथवा ग़ज़ल के कॉन्सर्ट में जाकर देखिए। सभी नहीं, लेकिन बहुत से लोग किस तरह उसमें मग्न हुए दिखते हैं। उनके चेहरे पर एक मुस्कान होती है, जैसे कि संगीत की नदी में वे बह रहे हों।

कभी-कभी हम उन विचारों में खो जाते हैं जो कुछ चिंता उत्पन्न करते हैं, यह महसूस किए बिना कि हम समय, ऊर्जा और स्वास्थ्य खो रहे हैं।यदि आपका मस्तिष्क लगातार मानसिक गड़बड़ है तो आपको लगता है कि किसी भी समय यहां विस्फोट हो जाएगा हम आपको 103 वाक्य छोड़ देते हैं ताकि आप अपने दिमाग को शांत कर सकें और उस शांति तक पहुंच सकें जो आप चाहते हैं .

वे कहते हैं कि एक झूठ दो हजार बार सच्चाई बन जाती है। हम मानते हैं कि न केवल झूठ, बल्कि किसी भी वाक्यांश को हजारों बार दोहराया जाता है, स्पष्ट और सटीक परिणामों के साथ वास्तविक और मूर्त रूप में बदल जाता है।

हम मानते हैं कि ये वाक्यांश आपको उस मानसिक अराजकता को रोकने में मदद कर सकते हैं, जिसके कारण आप पीड़ित हैं मनोविज्ञान और मन मैं चाहता हूं कि आप वाक्यांशों के इस संग्रह का आनंद लें जिसे हमने विशेष रूप से आपके लिए बनाया है।

हम अनुशंसा करते हैं: "तनाव से निपटने के लिए कुछ  आसान छूट तकनीक"

  • जहां पानी अपनी गहरी गहराई तक पहुंचता है, यह अधिक शांत रहता है .
  • यदि आप अपनी आत्मनिर्भर क्षमता में सुधार करते हैं, तो आप शांति प्राप्त करेंगे।
  • स्वतंत्रता में वह सब कुछ करने में सक्षम होना शामिल है जो किसी अन्य को नुकसान नहीं पहुंचाता है .
  • अन्य लोगों को परेशान करना मानसिक पीड़ा और पीड़ा का स्रोत है। दूसरों के इलाज के लिए खुश रहो!
  • शांति मुस्कुराहट से शुरू होती है .
  • मुस्कान और आप इस दुनिया को एक बेहतर जगह बना देंगे।
  • आपको सच्चाई के फुसफुसाते हुए रास्ता मिलेगा जिसे आप अपने दैनिक जीवन में अनुभव करते हैं। और जैसे ही आप उस मार्ग का पालन करते हैं, आपको हर दिन अधिक शांति और खुशी मिलेगी
  • महान घटनाएं मुझे शांत और शांत बनाती हैं; यह सिर्फ ट्राइफल्स है जो मेरे नसों को परेशान करता है 
  • दिन-प्रतिदिन की छोटी बाधाओं का सामना करना सीखें और अपने दिमाग को आराम करें।
  • जब आप उपस्थित होते हैं, तो आप दिमाग को होने की अनुमति दे सकते हैं क्योंकि इसमें उलझन में नहीं है 
  • एकाग्रता हमारे सच्चे आत्म को प्रकट करती है।
  • मैं हर समय शांत रहने का अभ्यास करता हूं, जो परिस्थितियों से तनावपूर्ण होता है. 
  • केवल अगर हम अपने दिमाग को शांत करने का प्रबंधन करते हैं तो आप अपने लक्ष्यों तक पहुंच जाएंगे।
  • अकेलापन शांति का घर है। 
  • सामाजिक अनिवार्य रूप से, कभी-कभी, अकेलापन फेंक दिया जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि थोड़ा अकेलापन आराम करने के लिए आदर्श है। ब्रेक लें!
  • शांत स्थान को भरने के लिए हम कितनी बार बात करते हैं? हम कितनी बार बकवास बकवास करते हुए अपनी सांस खो देते हैं?
  • कभी-कभी शब्द बहुत अधिक होते हैं। मौन, आपका सबसे अच्छा सहयोगी हो सकता है।
  • एक बतख की तरह बनो। 
  • मानसिक विश्राम आलस्य या उदासीनता का पर्याय नहीं है। आराम से रहना और एक ही समय में सक्रिय रहना असंगत नहीं है।
  • कभी-कभी, हमें क्या करना चाहिए या नहीं करना चाहिए, इस बारे में अज्ञानता हमें अस्थिर बनाती है। हमेशा सबसे जरूरी प्राथमिकता!
  • हम केवल अराजकता और अस्थिरता की स्थितियों में खुद को वास्तव में आराम से दिखा सकते हैं।
  • जबकि शांति और स्थिरता वांछित अवधारणाएं हैं, हमें अनुरूपता में गिरने के खिलाफ सावधान रहना चाहिए, क्योंकि वह अनुरूपता, विरोधाभासी रूप से बोलने से हमें भविष्य में पीड़ा मिल सकती है
  • आप पहले ही जानते हैं कि वे क्या कहते हैं; आंखें जो नहीं देखती हैं ...
  • अपने आप में हमेशा शांत, शांत रहें। इसके बाद, पता लगाएं कि साथ मिलना कितना आसान है. 
  • अपने साथ अच्छा लो और आप दूसरों के साथ अच्छी तरह से मिल जाएगा।
  • मेरे लिए कभी-कभी समुद्र की गर्जना  की तुलना में चुप्पी का आकाश अधिक अभिव्यक्तिपूर्ण होता है।
  • घातक चुप्पी से कहीं ज्यादा भयानक नहीं है, उसके चारों ओर एक महान शोर की सनसनी के साथ। 
  • कभी-कभी, चुप्पी तनाव और अस्थिरता का कारण बन सकती है।
  • सभी पुरुषों की दुःख अकेले रहने वाले कमरे में चुपचाप बैठने में सक्षम नहीं होने से प्राप्त होती है 
  • यदि आप देखते हैं कि आप अत्यधिक परेशान हैं, तो गहरी साँस लेने या दस की गिनती करने का प्रयास करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह काम करता है।
  • अब यह सब शांत है। इतना शांत आप लगभग अन्य लोगों के सपनों को सुन सकते हैं
  • मानसिक विश्राम, अप्रत्यक्ष रूप से, लोगों से निपटने के दौरान आपको अधिक अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।
  • जब आप पागल हो जाते हैं, तो आप चुप रहना सीखते हैं
  • कभी-कभी, जब आप रॉक तल पर हिट करते हैं तो आप केवल तभी फ़्लोट करते हैं। पीड़ा को कम मत समझो, यह आपके दिमाग को शांत करने के लिए विश्राम में महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • रचनात्मकता के लिए खुला होने के लिए, एक के पास एकांत के रचनात्मक उपयोग की क्षमता होनी चाहिए। हमें अकेले होने के डर को दूर करना होगा 
  • हमारे युग के सबसे महान नाटकों में से एक यह है कि अकेले रहना नहीं है।
  • मिठाई सुखद सामग्री के साथ विचार हैं, शांत मन कोरोन  से समृद्ध है
  • मानसिक विश्राम से आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ होने में मदद मिलेगी, बल्कि रचनात्मकता विकसित करने में मदद मिलेगी।
  • जब सब कुछ शांत होता है तो अपने पति को कोई बुरी खबर दें, जब वह दरवाजा खोलता है 
  • कभी-कभी, आपको यह जानना होगा कि चीजों को समझते समय संदर्भ कैसे चुनें।
  • खुश मनुष्य वह है जो राजा या किसान होने के नाते, अपने घर में शांति पाता है
  • पारिवारिक इकाई समाज के आधारों में से एक है। अपने परिवार को अच्छी तरह से इलाज करें और आप खुशी प्राप्त करेंगे।
  • समस्याएं हमेशा खत्म हो जाती हैं। कभी-कभी, शांति प्राप्त करना एक समय है कि समय बीतने के बारे में जानना एक बात है।
  • मैं कम से कम हूं। मुझे न्यूनतम  के साथ सबसे ज्यादा कहना पसंद है
  • Minimalism में हमारे दिमाग को शांत करने की अद्भुत क्षमता है, लेकिन क्या आपने कभी मानव संबंधों में इसे लागू करने की मंजूरी दे दी है?
  • यह खुशी का सरल रहस्य है। जो कुछ भी आप करते हैं, अतीत को रास्ते में न आने दें, भविष्य को परेशान न करें 
  • अतीत को अपने रास्ते में न आने दें!
  • शांतता और आत्मविश्वास वैनिटी से बहुत दूर है क्योंकि सभ्य जीवन की इच्छा लालच से दूर है
  • हमें स्वामित्व या बचपन के प्यार, और परिपक्व प्रेम के बीच अंतर करना चाहिए जो समझ और सहानुभूति का स्रोत है।
  • धीरज रखो। मिट्टी के निपटारे तक प्रतीक्षा करें और पानी स्पष्ट है। जब तक सही कार्यवाही नहीं होती है तब तक गतिहीन रहें
  • कभी-कभी धैर्य से सबसे अच्छे अवसर पैदा होते हैं।
  • एक पत्ते के बारे में चिंतित आपको पेड़ नहीं दिखाई देगा 
  • वास्तविकता का समग्र दृष्टिकोण रखने से आपको एक परिप्रेक्ष्य मिलेगा जो आपके दिमाग को शांत करने में मदद करेगा।
  • केवल दूसरों की करुणा और समझ का विकास हमें शांति और खुशी ला सकता है जिसे हम सभी चाहते हैं 
  • हमारा दिमाग स्वार्थीता के सरल और केवल प्रश्न के लिए शांत नहीं है? वास्तव में हमारे पास अधिक महत्व देने के लिए?
  • यह धन या महिमा नहीं है, लेकिन शांति और व्यवसाय जो आपको खुशी देता है
  • अपने और दूसरों के लिए उपयोगी महसूस करना आंतरिक शांति का स्रोत है।
  • केवल एक आंतरिक शांत से, आदमी शांतिपूर्ण वातावरण खोजने और बनाने में सक्षम था
  • निराशा केवल अराजकता छोड़ सकती है, लेकिन शांत आदेश आता है।
  • एक आदमी शांत हो जाता है, उसकी सफलता, उसके प्रभाव, उसकी शक्ति जितनी अधिक होती है। दिमाग की शांति ज्ञान के सुंदर गहने में से एक है 
  • केवल अपने दिमाग को शांत करके आप ज्ञान के अनंत मार्ग से परेड करेंगे।
  • यह मुझे सीधे और वफादार दिल की शांति से बनाए रखता है
  • नैतिकता के बिना कोई आध्यात्मिक शांत नहीं है।
  • शांति भीतर से आती है। इसके बाहर मत देखो
  • दूसरों के साथ क्या होता है इसके लिए जिम्मेदार न हों, आपके पास अपने जीवन का प्रभार लेने की कुंजी है .
  • सच्ची खुशी अच्छी विवेक से पैदा होती है
  • और जब आप अपने विचारों को खाड़ी में रखते हैं तो आप केवल अधिक जागरूक होते हैं
  • शांति से बल बनाए रखा जा सकता है; केवल समझकर हासिल किया जा सकता है
  • जब आप अपने सभी सार में स्वयं को समझते हैं, तो आप दूसरों को समझते हैं।
  • सही शांति में आपके स्वयं के साम्राज्य में दिमाग के अच्छे क्रम में शामिल है।
  • विश्राम की यह वाक्य मुझे लगता है कि आप विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं।इन अपने विचारों को व्यवस्थित करें और अपनी भावनाओं को हल करें।
  • मौन एक सच्चा दोस्त है जो कभी विश्वास नहीं करता 
  • इतनी शोर वाली दुनिया में ... थोड़ी चुप्पी हमेशा काम में आती है।
  • हमेशा अपने नियंत्रण में शांत, शांत रहें। आप पाएंगे कि साथ मिलना कितना आसान है
  • भावनाओं का नियंत्रण आवश्यक है ताकि आप आराम कर सकें।
  • खुशी प्रकृति, सौंदर्य और शांति है
  • तनाव से छुटकारा पाने के लिए यात्रा करने का प्रयास करें!
  • पुरानी उम्र एक उदासीन शांति की ओर ले जाती है जो आंतरिक और बाहरी शांति सुनिश्चित करती है 
  • हमें अपने बुजुर्गों को और अधिक सुनना चाहिए, क्योंकि केवल बुढ़ापे ही ज्ञान लाती है।
  • ज्ञान प्रतिबिंब से आता है 
  • चीजों पर प्रतिबिंबित करें, और आपको ज्ञान का मार्ग मिलेगा।
  • शांति हमेशा सुंदर होती है
  • जब आपको आध्यात्मिक शांति मिलती है, तो आप इसमें कुछ सुंदर दिखेंगे। 
  • आंदोलन जीवन है! एक अच्छा तरीका है कि आप अपने दिमाग को शांत करने के लिए आवेदन कर सकते हैं खेल खेलना है। सरल, है ना?
  • खुशी चेतना की एक स्थिति है जो शांति, सेवा, प्रेम और क्षमा से आता है
  • खुशी यूफोरिया की स्थिति नहीं है जहां सब कुछ गुलाबी है, और न ही यह आपके जीवन की सबसे अच्छी पार्टी होगी । खुशी, हालांकि, यह जानना शामिल है कि मन को शांत कैसे रखें।
  • उम्मीदवार की वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति को उस डिग्री से मापा जाता है जिसकी आंतरिक शांति प्राप्त होती है
  • आंतरिक शांत रहें और आप अपने जीवन में प्रगति करेंगे।
  • हम शांति में दासता  की तुलना में खतरे में आत्म-सरकार पसंद करते हैं
  • कभी-कभी, शांति एक विश्वासघाती घटना है। बुरी से अच्छी शांति को अलग करना सीखें।
  • सुनने के लिए सबसे अच्छा आदमी चुप है
  • मूक लोग, कभी-कभी, हमें बहुत छूट देते हैं। अपने आप को शांत लोगों के साथ घिराओ!
  • सच्ची मौन बाकी दिमाग है; यह आत्मा के लिए है कि शरीर, पोषण और ताजगी के लिए नींद क्या है 
  • निरंतर मानसिक संवाद, जिसे "स्क्रैचिंग" कहा जाता है, मन को शांत करने के लिए पूरी तरह प्रतिकूल है।
  • जो लोग नाराजगी से मुक्त हैं वे निश्चित रूप से शांति  पाएंगे
  • असंतोष और बदला आत्मा के लिए एक कैंसर है। इस तरह के वजन के साथ आप खुश नहीं हो सकते हैं। खुद को और आपके लिए, सभी हानिकारक भावनाओं से मुक्त करें।
  • सबसे स्पष्ट संकेत है कि सत्य पाया गया है आंतरिक शांति 
  • शांति तक पहुंचें, और आप सच्चाई तक पहुंच जाएंगे।
  • मौन शक्ति का स्रोत है 
  • जो आपको मारता है वह आपको मजबूत बनाता है, और निश्चित रूप से, मुझे नहीं लगता कि चुप्पी आपको मार देगी।
  • प्रसिद्धि और शांति कभी भी बिस्तर भागीदारों  नहीं हो सकती
  • यदि आप एक शांत जीवन पाने का नाटक करते हैं और प्रसिद्ध होना चाहते हैं, या मान लें कि आपके पास तनावपूर्ण जीवन होगा या आप किसी और चीज को बेहतर तरीके से समर्पित करेंगे।
  • हमारा सबसे बड़ा उपहार मौन की गरज है
  • मौन, बेहतर या बदतर के लिए, अधिकांश समय विनाशकारी है।
  • मौन दर्द के लिए दवा है 
  • जब किसी को चोट लगती है तो अकेले रहना नहीं चाहता था?
  • नेपोलियन बोनापार्ट पर ध्यान दें , इसके मेटल ने लगभग सभी यूरोप को जीतने के लिए काम किया।
  • मौन ज्ञान के चारों ओर एक बाड़ है 
  • यदि आप उन्हें संदर्भ से बाहर ले जाते हैं, तो इस पोस्ट के विभिन्न वाक्यांश विरोधाभासी प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन बहुत कम इसलिए क्योंकि वे एक ही विषय के आसपास एक दूसरे के पूरक हैं; उस मौन के बीच समझना सीखें जो आपको व्यक्तिगत विश्राम के करीब लाता है और जो आपको दूर ले जाता है। इस जीवन में कुछ भी पूर्ण नहीं है।
  • जो कुछ भगवान मनुष्य से चाहता है वह एक शांतिपूर्ण दिल है
  • अगर हम सभी थोड़ा आराम करते हैं, तो यह अनिवार्य रूप से अगले तार्किक परिणाम की ओर ले जाएगा: पृथ्वी पर शांति।
  • शांति का कोई रास्ता नहीं है, केवल शांति ही है
  • शांति प्रत्येक व्यक्ति का प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिए।
  • किसी भी गीत की तुलना में मौन अधिक संगीत है
  • हमारे कानों के लिए मौन शहद हो सकता है।
  • आप घटनाओं या परिस्थितियों से संबंधित तनाव से आते हैं
  • आपको जो कुछ भी परेशान करता है, उसके साथ एक दूरदर्शी दृष्टि जानें।
  • पूर्ण शांत समुद्र का कानून नहीं है। जीवन के महासागर में भी ऐसा ही होता है
  • जीवन में हमें कई समस्याएं मिलेंगी, लेकिन इसे दूर करने की ज़रूरत नहीं है! 
  • तनाव एक अज्ञानी अवस्था है। विश्वास के साथ कि सबकुछ एक आपात स्थिति है। कुछ भी इतना महत्वपूर्ण नहीं है
  • उन चीज़ों को महत्व देना सीखें जो वे वास्तव में लायक हैं।
  • कभी-कभी धैर्य गहन गणनाओं से अधिक फलदायी होता है. 
  • वे कहते हैं कि धैर्य विज्ञान की मां है। धैर्य रखने के लिए यह अनिवार्य है कि आप अपने दिमाग को शांत करते हैं, बाकी सब कुछ स्वयं ही आ जाएगा।
  • याद रखें कि अधिक घबराहट लोग हैं, अधिक लाभदायक यह शांत महसूस करना है। 
  • जब सबकुछ अलग हो जाता है, तो हृदय का स्वभाव आवश्यक हो जाता है।
  • मैंने पाया कि जो लोग शायद ही कभी अपनी भावनाओं पर ध्यान देते हैं, किसी से भी बेहतर जानते हैं कि भावना क्या है। 
  • वास्तव में पीड़ा के बिना कोई महिमा नहीं है।
  • हमें हमेशा शांतिपूर्वक और शांतिपूर्वक कार्य करना चाहिए 
  • यदि आप चीजें जल्दी से करते हैं, न केवल आप अधिक बाहर निकलेंगे लेकिन आपने तनाव और चिंता का भविष्य स्रोत उत्पन्न किया है।
  • यदि आप इस बारे में चिंता करते हैं कि यह क्या हो सकता है, और आपको आश्चर्य है कि यह क्या हो सकता है, तो आप यह अनदेखा करेंगे कि यह क्या है
  • खुश होने का मतलब यह नहीं है कि सबकुछ सही है। इसका मतलब है कि आपने अपूर्णताओं से परे देखने का फैसला किया है
  • आपके पास क्या है, और अपने आस-पास के लोगों से प्यार करना सीखें।
  • सद्गुण शांत और मजबूत होने में है; आंतरिक आग के साथ सबकुछ खराब हो जाता है
  • हम अपने जुनूनों के दास नहीं हो सकते हैं, क्योंकि तर्कसंगत प्राणियों के पास उनके पास नियंत्रण करने की क्षमता है।
  • इस दुनिया की कुल सद्भावना असंगतताओं द्वारा बनाई गई है
  • स्वीकार्य अधिकतम आपको बहुत पीड़ा बचाएगा। चीजें वे हैं जिस तरह से हैं।
  • मिठाई और हंसमुख चरित्र लोगों के साथ सब कुछ ठीक हो जाता है
  • दिमाग को आराम करने के लिए, हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें।
  • हम जो कुछ भी सोचते हैं उसका परिणाम वह है जो हमने सोचा है; हमारे विचारों पर आधारित है और हमारे विचारों बना है
  • यही कारण है कि मन से सभी नकारात्मक विचारों को खत्म करने की सलाह दी जाती है।
  • सबकुछ होता है; केवल शांति बनी हुई है
  • कुछ भी शाश्वत नहीं है, लेकिन स्थिरता केवल अधिक स्थिरता उत्पन्न कर सकती है, और यह स्थायी है।
  • हर दिन भगवान हमें एक पल देता है जब हमें हर चीज को बदलना संभव होता है जो हमें दुखी करता है। जादू क्षण वह क्षण है जब एक हां या कोई हमारे पूरे अस्तित्व को नहीं बदल सकता
  • अपने जीवन को बेहतर बनाने का मौका बर्बाद मत करो!
  • अपराध, पश्चाताप, नाराजगी, उदासी और माफी के विपरीत किसी भी रूप में, अतीत से अधिक और वर्तमान की कमी के  कारण होता है
  • अतीत, अतीत है। यह कितना महत्वपूर्ण है?
  • अगर हम अपने साथ शांति नहीं रखते हैं, तो हम दूसरों को अपनी शांति की खोज में मार्गदर्शन नहीं कर सकते
  • एक अंधे आदमी की तरह एक अंधे आदमी को मार्गदर्शन नहीं कर सकता।
  • अगर हमारे पास हमारे अंदर शांति नहीं है, तो इसे बाहर देखने के लिए बेकार है
  • न केवल आपके लिए, बल्कि दूसरों के लिए आंतरिक शांति की तलाश करें।
  • यदि आपके पास चीजों को खुशी से लेने की आदत है, तो आप शायद ही कभी कठिन परिस्थितियों में खुद को ढूंढ लेंगे .
  • कभी-कभी, आत्म-धोखाधड़ी, वास्तविक रूप से, ऑटो-सुझाव द्वारा बनाई जाती है। हालांकि पहले आप इसे विश्वास नहीं कर सकते हैं, मुस्कान करने की कोशिश करें, परिणाम अकेले आ जाएंगे।
  • खुशी की तलाश करना दुःख के मुख्य स्रोतों में से एक है .
  • पूर्ण खुशी मौजूद नहीं है। इसके लिए मत देखो, यह स्वयं ही आ जाएगा .
  • एक अच्छी विवेक है और आपको हमेशा खुशी होगी। अगर दुनिया में कोई खुशी है, निश्चित रूप से शुद्ध दिल वाले व्यक्ति के पास यह है 
  • उसे अशांत करनेवाली बातों, लोगों और हरकतों, आदतों से मुक्त करके, ध्यान और योग की विधियां किसी योग्य प्रशिक्षक या गुरु से सीखिए और उनका नियमित अभ्यास कीजिये।
  • यदि नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं तो तुरंत इसे बंद कीजिए, शारीरिक श्रम, खेलकूद में भाग लीजिये, सूर्योदय और सूर्यास्त का आनंद लीजिये किसी खुले प्राकृतिक स्थान से नदी या तलाब के किनारे,
  • हल्का और सुपाच्य भोजन कीजिये, फल , मेवे और सब्जियों का सेवन अधिक कीजिये, जंक फूड और ड्रिंक्स से पूरी तरह दूर रहिये।
  • अच्छी और उपयोगी पुस्तकें पढ़िए, शांत मधुर संगीत का स्वाद लीजिये, बच्चों के साथ खेलिए घरेलू कामों में मां और परिवार के लोगों की मदद कीजिये, पौधे लगाइए, उनकी देखभाल कीजिये, अच्छी संगति में रहिये या अकेले रहिये, यह ज्यादा बेहतर होगा।
  • थोड़ा समय एकांत में बिताइए, और अपने मन की हरकतों का निरीक्षण कीजिये, अपने मन और शरीर को रचनात्मक और रुचि के कार्यों, खेल, संगीत, हॉबी में व्यस्त रखिये, कुछ नया सीखने की ओर ध्यान लगाइए।
  • बहुत कुछ आप ऐसा कर सकते हैं जिससे आपका मन और शरीर एक लय और ताल में आ जाएं और आपके निर्देशों का पालन करें, ना कि आप पर हावी हो सकें।
  • एक नियमित अनुशाषित रूटीन का पालन कीजिए, सुबह उठने से रात्रि सोने तक सभी बातों का ध्यान रखिये, जो जरूरी और गुणात्मक हो उसे कीजिये और जो व्यर्थ और धन, समय और ऊर्जा को व्यर्थ करने वाली बातें, आदतें और कार्य हों उन्हें अपने जीवन से विदा कीजिये।
  • आप अशांत है इसका मतलब आप अपने खिलाफ कोई काम कर रहें हैं, तन और मन दोनों के तल पर, यह गलत आदतों, संगति, कार्य का चुनाव या कोई और दवाब भी हो सकता है जिसे आपने अपने जीवन में शामिल किया है या होने दिया है, इसके नकारात्मक प्रभाव से मुक्त होने में सक्षम बनिये और उन्हें अपने जीवन से दफा कीजिये।
  • आप ही अपनी खुशी और समस्याओं के जनक, निर्धारक और उनसे मुक्तिदाता हैं, देखिये आपने किस किस्म की बीमारियां और रोग पाल रखे हैं, चाहे आपकी मर्जी से चुने हुए हों या दूसरों के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष दवाब या प्रभाव से आपके जीवन का हिस्सा बन गए हों।
  • अपने उच्चतम लक्ष्य के रूप में मन की शांति स्थापित करें, और इसके चारों ओर अपने जीवन को व्यवस्थित करें।
मन की शांति मानसिक और भावनात्मक शांति की स्थिति है, जिसमें कोई चिंता, भय या तनाव नहीं है। इस अवस्था में, मन शांत होता है, और आप खुशी और स्वतंत्रता की भावना का अनुभव करते हैं। तो, एक 'शांतिपूर्ण दिमाग' शब्द का उपयोग एक मानसिक स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जाता है जिसमें मानसिक और भावनात्मक शांति होती है। यह एक ऐसी अवस्था है जहां आपका मन चिंताओं और चिंताओं से नहीं उकसाया जाता है। मानसिक गतिविधि को चरणबद्ध किया जाता है ताकि शांति और शांति का अनुभव किया जा सके। अतीत या भविष्य से परेशान होने के बजाय आपका ध्यान इस वर्तमान समय पर टिका हुआ है, अब आप जीवित हैं।

फलतः मन एक महासागर की तरह है। ज्यादातर लोगों के लिए, दिमाग लगातार घूम रहा है, पानी की तरह, बिना किसी आराम के। यह हमारे बेचैन और भागते हुए विचारों से उत्तेजित होता है, जैसे किनारे पर लहरें। हमारी इच्छाएँ और भय न केवल हमें परेशान करते हैं, बल्कि वे हमें पीस ऑफ़ माइंड खोजने से भी रोकते हैं। हवा की तरह, हमारे विचारों और चिंताओं को एक तूफानी महासागर तक ले जा सकते हैं, हमें आराम करने की अनुमति के बिना। मन, हालांकि, अपने आप में पानी की तरह तटस्थ है। यदि आप अपने दिमाग पर अपने विचारों के प्रभाव को कम करने में सक्षम हैं, तो आप एक शांत समुद्र बनाएंगे। हमारी मानसिक शांति हमारे विचारों को शांत करने की हमारी क्षमता पर अत्यधिक निर्भर करती है। आप इस आशा के साथ कि इस चाल में पानी को पाकर महासागर को शांत नहीं कर पाएंगे। यह बस काम नहीं करता है। इसके बजाय, समस्या की जड़ को संबोधित करना आवश्यक है, जो हवा है, या हमारे मामले में हमारे भय, इच्छाएं और विचार हैं। यदि आप एक शांत समुद्र चाहते हैं तो आपको समुद्र पर हवा के प्रभाव को रोकना होगा। हमें इन भावनाओं और विचारों को नियंत्रित करने के लिए सीखने की जरूरत है ताकि हमारी मानसिक स्थिति इससे अप्रभावित रहे। इसके लिए सही तरीके से काम करने के लिए, हमें अपना ध्यान नियंत्रित और मजबूत करने की आवश्यकता है।

हम सभी ने इस शानदार मानसिक स्थिति का अनुभव किया है, जिसे मन की शांति कहा जाता है, उदाहरण के लिए, एक छुट्टी के दौरान या एक अद्भुत पुस्तक द्वारा गहराई से अवशोषित किए जाने पर, एक मनोरंजक फिल्म या टीवी कार्यक्रम देखना, किसी ऐसे व्यक्ति की कंपनी में होना, जिससे आप प्यार करते हैं, झूठ बोलना समुद्र तट पर रेत, जब आप किसी प्रकार की मानसिक सुन्नता का अनुभव करते हैं, तो अपने काम और दिन-प्रतिदिन के जीवन को भूलकर, गहरी नींद में, जब आपको कुछ भी पता नहीं होता है। ये सभी शांतिपूर्ण क्षण इतने दुर्लभ नहीं हैं। आपने उन्हें अतीत में अनुभव किया है, ऐसे समय में जब आप किसी तरह की अवशोषित या दिलचस्प गतिविधि में लगे थे। इस अवस्था के दौरान, हम अपनी चिंताओं और विचारों से परेशान नहीं थे। इसके बजाय, हमारा मन शांत था - हमें आंतरिक शांति मिली थी।

इस तरह की गतिविधियां, और इसी तरह के लोग अपने सामान्य विचारों, चिंताओं और निरंतर सोच से मन को दूर करते हैं, उन्हें आंतरिक शांति के साथ प्रतिस्थापित करते हैं। आमतौर पर, यह अवस्था कुछ समय तक ही रहती है, लेकिन हम इसका आनंद लेते हैं।आप यह भी पूछ सकते हैं कि क्या यह एक आदत में बदलना संभव है, और हमेशा और सभी परिस्थितियों में इसका आनंद लें। वास्तव में, कुछ चीजें हैं जो आप अपने जीवन में अधिक शांति का आनंद लेने के लिए कर सकते हैं, और समय के साथ, आप इसे अक्सर अनुभव करने की क्षमता प्राप्त कर सकते हैं।

तो, आंतरिक शांति अंततः, बाहरी शांति की ओर ले जाती है। अपने भीतर की दुनिया में, अपने मन में शांति पैदा करके, आप इसे अपनी बाहरी दुनिया में, और दूसरे लोगों के जीवन में लाते हैं।हर मिनट आप गुस्से में रहते हैं, आप मन की शांति के साठ सेकंड छोड़ देते हैं

अब, सवाल यह है कि हमारे जीवन में मन की शांति को कैसे लाया जाए। इसका मतलब है, हम अपने जीवन में मानसिक शांति और मन की शांति को आमंत्रित करने के लिए महासागर को कैसे शांत कर सकते हैं? इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि तनावपूर्ण और विषम परिस्थितियों में या महान निराशा और कठिनाइयों के समय भी हम एक शांत मन कैसे रख सकते हैं?

आज की भाग-दौड़ की जिन्दगी में लोग काफी व्यस्त होते है जिसके कारण उनके व्यवाहार में कई परिवतर्न देखने को मिलते है जो आपके परिवार के साथ साथ आपके कार्यों में भी इस प्रकार का व्यवहार काफी बाधा डालते हैं। क्योकि इसमें चाहे छोटा बच्चा हो या फिर कोई बड़ा युवा हर कोई आज के बढ़ते तनाव में जी रहा है। बच्‍चों की बात करें तो उनका पढ़ाई से चिड़चिड़ापन, युवाओं को अपने जॉब की चिंता इन सभी का असर हमारे स्वास्थ पर पड़ता है जिससे हमारा व्यवहार भी बदलता जाता है और ऐसी स्थिति में हमारी कार्यक्षमता काफी प्रभावित होती है जिससे हमारे शारीरिक व मानसिक गति में अवरोध पैदा होने लगता है, जाने अपने इस मिजाज को सही करने के कुछ खास उपाय…

अपने मन को शांत करने के तरीके

अक्सर आप देखते है कि आप जब किसी के बीच बैठते है और मन अशांत होता है तो आप उस समय शराब का सेवन कर शांति की खोज करने लगते है पर इस प्रकार की जीवनशैली आपके लिये घातक सिद्ध हो सकती है इसका विपरीत असर आपके स्वास्थ में देखने को मिलेगा जिससे आपके शरीर में पौषक तत्वों की कमी होने लगती है और आप इस बीमारी से कभी भी उबर नही पायेगे. इसलिये आप ऐसे समय में पौषक तत्वों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करे जिससे आपके मन में शांति अपने आप ही प्रतीत होने लगेगी और यही पौषक तत्व आपके खराब मूड का मुकाबला करने में आपकी सहायता करते है।

अपने डॉक्टर को दिखाने में शर्म महसूस न करें:

यदि आपका व्यवहार लगातार बदलता जा रहा है तो आप इसके लिये तुरंत ही किसी अच्छे चिकित्सक से अपनी जांच करवाएं अपना बात को सामने रखने में आप किसी भी प्रकार की हिचक महसूस ना करते हुये पूरी बात डॉ. के सामने रखें जिससे वो आपके लिये सही मार्गदर्शन दे सके और दवाइयों के द्वारा आपकी समस्या का समाधान किया जा सके।

अपने मन को आराम देने की कोशिश करे:

आपका मन काफी शांत सा है तो ऐसे समय में आप भरपूर नींद लेने की कोशिश करें इसके साथ ही अपना मन एक जगह केन्द्रित करने के लिये अपनी आखों को बंद कर मांस पेशियो को पूरी तरह से ढीला छोड़ दे और धीमी गति से सांस लेते हुए किसी एक चीज में अपनी ध्यान केन्द्रित करने की कोशिश करें। पुरानी बातों को याद करें जो किसी अच्छे दिन का अहसास कराती हो इसके अलावा पुरानी फोटो, संगीत सुन कर अपना मन बांटने की कोशिश करें।

सिस्टम से बाहर निकले दोस्तों या परिवार से बात करें:

अवसाद या तनाव के समय की इस कठिन परिस्थति के समय आप अकेले रहने की बिल्कुल कोशिश ना करें इससे आप नाकारात्मक बातों पर ज्यादा ध्यान देने लगेगे इसके लिये आप अपने परिवार के बीच में जाये अच्छे दोस्तों के साथ रहे जो आपके तनाव को कम कर रास्ते बनाने में अपनी अहम भूमिका का निर्वाह करते है। आपकी हर समस्याओं में आपकी मदद करते है।

संतुलित आहार:

एक संतुलित आहार आपके शरीर के लिये जितना आवश्यक होता है उतना ही आपकी शारीरिक गतिविधियों को भी ज्यादा प्रभावित करता है इससे आपका मन शांत और खुश रहता है। एक अच्छा भोजन दुखी मन को भी खुश रखने की शक्ति प्रदान करता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, बिन्स, और अनाज गेहूं, सोयाबीन, मूंगफली, फल आदि चाजों में पौष्टिक तत्वों की ज्यादा मात्रा पाई जाती है जो आपके शरीर को तनाव से लड़ने में सहायता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता है।

कुछ मीडिया विकर्षणों को समाप्त करें: 

अपना समय अनुकूलित करें: मीडिया की खपत हमारे मन के भीतर बहुत अशांति पैदा कर सकती है। ये मीडिया विक्षेप टेलीविजन, रेडियो, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं से लेकर वीडियो गेम और संगीत तक हैं। समाचार पत्रों को पढ़ने या टीवी पर समाचार देखने के लिए आप जो समय बिताते हैं उसे कम से कम करें। चूंकि अधिकांश समाचार नकारात्मक समाचार होते हैं, और आप उनके बारे में कुछ नहीं कर सकते, इसलिए आपको उनके बारे में क्यों सोचना चाहिए और तनावग्रस्त और चिंतित महसूस करना चाहिए? मूल रूप से, वे सभी आम हैं कि इन मीडिया श्रेणियों के भीतर कुछ प्रकार आपके मानसिक स्थिति को नकारात्मक तरीके से प्रभावित कर सकते हैं।

नकारात्मक विचारों को दूर रखें:

नकारात्मक बातचीत और नकारात्मक लोगों से दूर रहें। आप नहीं चाहते कि उनके विचार और शब्द आपके अवचेतन मन में डूब जाएं और आपकी मनोदशा और मन की स्थिति को प्रभावित करें।

पकड़ मत लो और क्षमा करने के लिए जानें: 

यह भावनात्मक सामान समय के साथ जमा हो जाता है और एक भारी बोझ बन जाता है जिसे हम अपने कंधों पर ले कर चलते हैं। भूलना और क्षमा करना सीखो। बीमार भावनाओं और शिकायतों का पोषण करने से आपको दर्द होता है और नींद की कमी होती है। यह महसूस करना महत्वपूर्ण है कि हम उन चीजों को नहीं कर सकते हैं जो पूर्ववत हुई थीं। अपने क्रोध पर पकड़ केवल आपको अंदर से जलाएगी, इस तथ्य का उल्लेख नहीं करने के लिए कि यह आपको मन की शांति पाने से रोक देगा। इस कारण से, दूसरे को माफ करना सीखना बहुत महत्वपूर्ण है। आंतरिक सद्भाव बनाए रखने के लिए क्षमा महत्वपूर्ण है। यह आपको क्रोध और आंतरिक अशांति को दूर करने में मदद करेगा। क्षमा करने में सक्षम होने से आपको दर्द को दूर करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि जब आप आंतरिक सौहार्द स्थापित करना चाहते हैं तो माफी एक महत्वपूर्ण कौशल है।

ईर्ष्या मत करो: 

अन्य लोगों से ईर्ष्या मत करो। ईर्ष्या का अर्थ है कि आपके पास कम आत्मसम्मान है, और इसलिए, अपने आप को अन्य लोगों से नीचा समझते हैं। ईर्ष्या और कम आत्म-सम्मान, अक्सर, मन की शांति की कमी का कारण बनता है।उन चीजों के लिए समय बर्बाद न करें जो आपके नियंत्रण से परे हैं: स्वीकार करें कि क्या बदला नहीं जा सकता है। यह बहुत समय, ऊर्जा और चिंताओं को बचाता है। हर दिन, हम कई असुविधाओं, परेशानियों और परिस्थितियों का सामना करते हैं जो हमारे नियंत्रण से परे हैं। यदि हम उन्हें बदल सकते हैं, तो यह ठीक है, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं है। हमें इस तरह की चीजों को अपनाना और उन्हें खुशी-खुशी स्वीकार करना सीखना चाहिए।

अतीत पर मत करो: 

अतीत समय-समय पर हम में से हर एक का शिकार करता है। अतीत अब यहां नहीं है, तो इसके बारे में क्यों सोचा जाए? अतीत को भूल जाओ और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करो। अप्रिय यादों को भड़काने और उनमें डूब जाने की आवश्यकता नहीं है। जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोचने और अतीत में बार-बार की गई गलतियों के कारण आपके दिमाग में बहुत उथल-पुथल मच जाएगी। इस कारण से, अतीत पर ध्यान नहीं देना इतना महत्वपूर्ण है। आप अतीत को नहीं बदल सकते। हालांकि, आपके पास इस वर्तमान क्षण में हमेशा अपनी स्थिति बदलने का मौका होता है। इसलिए, अतीत की भारी भावनात्मक और अप्रिय यादों की निकासी से बचने के लिए जानें। वर्तमान स्थिति पर अपना ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।

पहचान के एक निश्चित स्तर की पहचान करें: 

भावनात्मक और मानसिक पहचान आवश्यक है: व्यक्तिगत रूप से भी सब कुछ न लें। भावनात्मक और मानसिक टुकड़ी की एक निश्चित डिग्री बहुत मददगार है। कई अवसरों पर, टुकड़ी और गैर-भागीदारी के एक निश्चित उपाय को इंजेक्ट करना उपयोगी होगा। यह आपके जीवन में अधिक शांति, सद्भाव और सामान्य ज्ञान लाएगा। जब मानसिक शांति और सद्भाव स्थापित करने की बात आती है, तो कुछ हद तक मानसिक और भावनात्मक टुकड़ी का महत्व हो सकता है। आप देखेंगे कि बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो थोड़ी सी भी उत्तेजना से आसानी से आहत हो जाते हैं। वे सबसे हास्यास्पद चीजों के बारे में शिकायत करना शुरू करते हैं, गुस्से में पत्र लिखते हैं या इंटरनेट मंचों पर भाप छोड़ देते हैं। उनमें से एक मत बनो हर चीज और हर किसी से नाराज न होने के महत्वपूर्ण कौशल को जानें। आंतरिक शांति का एक बड़ा स्तर उन चीजों से खुद को अलग करके प्राप्त किया जा सकता है जो केवल आपके ध्यान के लायक नहीं हैं।

अपने दिमाग को फोकस करें: 

अपने दिमाग को फोकस करना सीखें। जब आप अपने दिमाग पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, तो आप अधिक आसानी से चिंताओं और चिंताओं को अस्वीकार कर सकते हैं, नकारात्मक विचारों को सोचने से इंकार कर सकते हैं और अपने मन की निरंतर बकवास को कम कर सकते हैं।

ध्यान: 

ध्यान हर किसी के लिए चाय का कप नहीं है, लेकिन अगर आपके पास समय है, और इसे आज़माने के लिए तैयार हैं, तो भी दिन में सिर्फ कुछ मिनट आपके जीवन में बदलाव लाएंगे। आप अधिक शांत, तनावमुक्त और खुशहाल बनेंगे। यदि आप लंबे समय तक चलने वाली मानसिक शांति स्थापित करने के लिए उचित आधार बनाना चाहते हैं, तो ध्यान के आसपास कोई रास्ता नहीं है। यह केवल सबसे प्रभावी चीज है जो आप कर सकते हैं। ध्यान, मेरा मतलब है कि इस संदर्भ में एक आध्यात्मिक अभ्यास नहीं है, लेकिन केवल एक मानसिक अभ्यास है ताकि आपकी मानसिक गतिविधि को शांत किया जा सके।

टहलें: 

प्रकृति में घूमें और अपने नजदीकी पार्क से सैर करें। प्रकृति के माध्यम से चलने की अनुभूति न केवल आपको जमीन पर ले जाएगी, बल्कि यह आपके दिमाग को शांत करने में भी मदद करेगी। टहलना बेहद प्रभावी है, लेकिन ज्यादातर लोग दुख की बात है कि इसके लाभों को भूल गए हैं।

फैली हुई खुशी और शांत: 

हमारे पास अपने परिवेश को प्रभावित करने की क्षमता है। जब हम एक ऐसे कमरे में प्रवेश करते हैं जहां लड़ाई हुई है, तो हम असहज महसूस करते हैं। जबकि, जब हम एक कमरे में प्रवेश करते हैं जहां एक बच्चा खेल रहा होता है, तो मधुर भावना हमें पकड़ लेती है। इसी तरह, जैसा कि हम नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करते हैं, हम अपने भीतर एक ध्यान देने योग्य परिवर्तन देखेंगे। हम अपने चारों ओर एक सुंदर ऊर्जा लेकर जाएंगे। यह न केवल हमारे लिए, बल्कि हमारे आसपास के लोगों के लिए भी स्पष्ट होगा।


आप ही अपने सबसे बड़े मित्र या शत्रु है, देखिये आप क्या होना चुनते हैं, आपकी मर्जी के बिना आपको न कोई सुखी कर सकता है और न अशांत और दुखी, अपना ख्याल रखिये, शुभाशीष एवं शुभकामनायें

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