जीवन एक संघर्ष है

1. संघर्ष क्या है- 

संघर्ष किसी अन्य व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की इच्छा का जानबूझकर विरोध करने अथवा उसे शक्ति से पूर्ण कराने से सम्बन्धित प्रयत्न है।

Welcome to जीवन एक संघर्ष है

संघर्ष प्रतिकूलता के पश्चात प्रारम्भ होता है। स्वार्थपरता बढ़ने से व्यक्ति दूसरे को हानि पहुंचाने लगता है। इसके विरोध में दूसरा व्यक्ति अपनी रक्षा करने का प्रयत्न करता है और उसको हानि पहुंचाने से रोकता है। जिससे मनोवैज्ञानिक स्तर पर संघर्ष की रूपरेखा बनती है तथा अवसर आने पर प्रत्यक्ष संघर्ष होने लगता है।

'जीवन संघर्षमय है इससे घबराकर थमना नही चाहिए'

संघर्ष मनुष्य को मज़बूत बनाता है , संघर्ष से मनुष्य को कभी नहीं डरना चाहिए।    हिम्मत रखकर हमेशा आगे बढ़ना चाहिए। 

संघर्ष की प्रकृति

दोस्तों संघर्ष में द्वन्दियों का पूरा ज्ञान होता है। उद्देश्य व लक्ष्य प्राप्त करने के साथ-साथ विरोधी का दमन भी करना होता है। शक्ति का अधिकाधिक उपयोग होता है।
  • संवेग (क्रोध) तेज होते हैं। सतर्कता अधिक होती है।
  • स्थितियों का सूक्ष्म से सूक्ष्म विश्लेषण होता है।
  • व्यक्ति प्रधान होता है।
  • लक्ष्य विरोधी की ओर अग्रसित होते हैं।
  • नियम व कानूनों का उल्लघन होता है।
  • विरोधी का दमन होता है।
  • शक्ति का हृास होता है।
  • संचय की प्रवृत्ति उत्पन्न करती है।

संघर्ष तथा प्रतिस्पर्धा में अंतर

प्रतिस्पर्धा संघर्ष

  •   यह अवैयक्तिक प्रक्रिया है।
  •   संघर्ष चेतन होता है।
  •   यह अवैयक्तिक प्रक्रिया है।
  •   यह वैयक्तिक प्रक्रिया है।
  •   यह निरन्तर होती है।
  •   संघर्ष कभी-कभी होता है।
  •   विरोधियों के प्रति कम द्वेष होता है।
  •   विरोधियों को हानि पहुँचाना प्रमुख उद्देश्य होता है।
  •   उद्देश्य प्राप्त करना लक्ष्य होता है।
  •   हिंसा का प्रयोग होता है।
  •   प्रतिस्पर्धा से दोनों पार्टियों को लाभ
  •   प्रायः दोनों विरोधियों को हानि होती है।
  •   यह न्यूनतम प्रथक करने वाली प्रक्रिया है
  •   यह पूर्ण प्रथम करने वाली प्रक्रिया है।
  •   यह वैयक्तिक गुणों तथा परिश्रम
  •   संघर्ष परिश्रम को प्रोत्साहित करती है।
  •   प्रतिस्पर्धा से उत्पादन बढ़ता है।
  •   संघर्ष उत्पादन को कम करता है।

संघर्ष का परिणाम - 

समाज पर संघर्ष के निम्न प्रभाव होते है:

1. स्व समूह में एकरूपता

  • समूहों में संगठन
  • आन्तरिक विवादों तथा मतभेदों का अंत
  • कार्यों एवं विश्वासों में एकरूपता

2. समूह में एकता की कमी

नियंत्रण कमजोर हो जाता है।

3. व्यक्तित्व में परिवर्तन

  • तनावपूर्ण विघटन होता है।
  • सांवेगिक विघटन होता है।
  • दृष्टिकोण सीमित हो जाता है।
  • घृणा का वीभत्स रूप देखने को मिलता है।

4. खून खराबा तथा आर्थिक हानि

यदि दोनों पार्टियाँ समान शक्तिशाली होती है तो व्यवस्थापन होता है अन्यथा आधिपत्य का परिणाम होता है।

संघर्ष के स्वरूप

संघर्ष के प्रायः दो स्वरूप होते हैं:-

1. उद्देश्य के आधार पर संघर्ष-

युद्ध, कलह, प्रतिद्वंदिता, मुकदमेबाजी, आदि।

संघर्ष जहाँ एक ओर विघटन उत्पन्न करता है वहीं दूसरी ओर अनेक आवश्यक गुणों का विकास भी करता है। ये निम्न गुण हैंः

1. चेतनता का विकास

  • सदैव सतर्क रहते हैं।
  • अवसर का उपयोग करते हैं।
  • स्थिति का निरीक्षण एवं परीक्षण करते हैं

2. सहयोग में वृद्धि

  • पारस्परिक सहयोग बढ़ जाता है।
  • सामूहिक एकरुपता बढ़ जाती है।

3. परिश्रम में वृद्धि

  • व्यक्ति अधिक से अधिक परिश्रम करता है।
  • नवीन ज्ञान अर्जित करता है।

4. शक्ति का ज्ञान -

  • समस्त श्रोतों का ज्ञान होता हे।
  • क्षमता का ज्ञान होता है।
  • साधनों का ज्ञान होता है।

5. आत्म चेतना विकास

-ज्ञान एवं बुद्धि का विकास होता है।
-निर्णय क्रिया एवं प्रत्यक्षीकरण में सूक्षमता आती है।

6. सामूहिक भावना का विकास 

  • समूह हित की भावना बढ़ती है।
  • नये समूह निर्मित होते हैं।

7. चरित्र निर्माण

  • गुणों का प्रकटन होता है।
  • आत्म स्थापन की इच्छा पूरी होती है।

दोस्तों मंजिल और ज़िन्दगी में कामयाब बनने के लिए संघर्ष जरूरी है , संघर्ष से हम सब कुछ हासिल कर सकते है | बार-बार हार के भी हिम्मत रखना और मेहनत करने के साथ अपने लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ाना ही संघर्ष है। ... हमें कभी भी संघर्ष डरना नहीं चाहिए | संघर्ष के बिना कोई भी सफलता नहीं पा सकता है।

संघर्ष ही जीवन है । जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है । इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं । जिसने संघर्ष (Struggle) करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया । जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ । तरह-तरह के संघर्षों का सामना आएदिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है । जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता ।

दोस्तों सफलता व कामयाबी (Success) की चाहत तो सभी करते हैं, लेकिन उस सफलता को पाने के लिए किए जाने वाले संघर्षों से कतराते हैं । मिलने वाली सफलता सबको आकर्षित भी करती है, लेकिन उस सफलता की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले संघर्ष (Struggle) को कोई नहीं देखता, न ही उसकी और आकर्षित होता है, जबकि सफलता तक पहुँचने की वास्तविक कड़ी वह संघर्ष ही है । हम जिन व्यक्तियों को सफलता की ऊँचाइयों पर देखते हैं, उनका भूतकाल अगर हम देखेंगे तो हमें जानने को मिलेगा की यह सफलता जीवन के साथ बहुत संघर्ष से प्राप्त हुई है ।

जीवन में इतना संघर्ष क्यों है इसका एकदम सटीक जवाब शायद ही कोई जानता होगा। भगवान ने हमें हमारा जीवन दिया है और इस अनमोल जीवन को पाने के लिए अगर हम थोड़ा संघर्ष कर भी लेते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। हर इंसान के जीवन में संघर्ष की एक कहानी जरूर होती है।

जीवन में आए संघर्ष के समय से कभी डरना नहीं चाहिए, क्योंकि आप यह जान लीजिए कि अगर आप इस संघर्ष को पूरी हिम्मत के साथ पार कर लेते हैं, तो इसके आगे आपके जीवन में कई सफलता और खुशियां आपका इंतजार कर रही होती हैं।

दोस्तों जीवन में जो संघर्ष से हार मान जाता है समझो वह अपने जीवन से भी हार जाता है। जीवन में शायद इतना संघर्ष इसलिए भी है, ताकि हम भगवान की दी हुई चीजों की कीमत समझ सके। आप खुद सोच कर देखिए अगर जीवन एकदम आसानी से बिना किसी परेशानी के चलने लगे तो क्या हमें जीवन में रिश्तें, पैसे, प्रकृति या हमारे पास जीवन में जो कुछ भी है उसकी अहमियत हमें समझ आएगी? नहीं आएगी।

जब हम किसी भी चीज को मुश्किल से बड़ी कठिनाइयों से पाते हैं तो उसकी कीमत हमारे जीवन में बढ़ जाती है। शायद इसलिए भगवान ने हमें जीवन में इतने संघर्ष दिए हैं। ताकि हम जीवन में उपलब्ध चीजों की कीमत समझ सके उसे सहेजें और जीवन को संतुलित करते हुए आगे बढ़ते जाएं।

जीवन का दूसरा नाम ही संघर्ष है। अगर आप पौराणिक कथाओं को पढ़ेंगे तो देवी-देवताओं के जीवन में भी संघर्ष था। फिर तो हम सामान्य से मानव है। हमें तो भगवान द्वारा ली गई परीक्षा का सामना करना ही पड़ेगा।
 

मेरी धारणा है कि इंसान अपनी जिंदगी में हमेशा सीखता है। यदि सीखने की भावना हमेशा प्रबल बनी रहे तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी हल हो सकती है। इसलिए इस संदर्भ में कह सकते हैं जीवन एक संघर्ष है बाक़ी सबका देखने का स्वभाव अलग-अलग होता है। एक बात और कहना चाहूंगा कि हमेशा जिंदगी को सकारात्मकता के साथ जिएं तो जीने का आनंद आप अनुभव करेंगे, समस्याएं आती हैं पर डट कर मुकाबला करें तो वो भी तुच्छ सी लगती हैं।

संघर्ष ही जीवन है । जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है । इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं । जिसने संघर्ष (Struggle) करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया । जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ । तरह-तरह के संघर्षों का सामना आएदिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है । जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता ।

दोस्तों संघर्ष! यह एक ऐसा अनुभव है जिससे शायद ही दुनिया का कोई व्यक्ति वंचित हो। हमें बचपन से सिखाया जाता हैं कुछ भी पाने के लिए संघर्ष करना ही पड़ता है। बिना इसके कभी कुछ हासिल नहीं होता। समाज में प्रतिष्ठा, नाम-शोहरत, रुपया-पैसा, तरक्की या फिर पढ़ाई में अव्वल होना हो, चाहे जो भी लक्ष्य हो उसे प्राप्त करना बिना संघर्ष के संभव नहीं।

इसमें कोई दोराह नहीं की संघर्ष जीवन को तराशता है, निखारता है, सँवारता है और फिर हमें ऐसे साँचे में गढ़ता है जिसकी प्रसिद्धि दुनिया करते नहीं थकती। शायद यही वो मुकाम होता है जिसके लिए मनुष्य अथक प्रयास करते जाता है जिसे हम संघर्ष कहते हैं। इसके पश्चात जो सफलता प्राप्त होती है निसंदेह वो अतुलनीय होती हैं।

संघर्ष ही है सफलता की कुंजी
है
संघर्ष जीवन के उतार-चढ़ाव का अनुभव कराता है, अच्छे-बुरे का ज्ञान करवाता हैं, सतत सक्रिय रहना सिखाता है, समय की कीमत सिखाता है जिससे प्रेरित होकर हम सशक्तिकरण के साथ फिर से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते है और जीवन जीने के सही तरीके को सीखते हैं।

दुनिया का हर व्यक्ति जीवन में सफलता की उम्मीद करता हैं जिसके लिए वो अथक प्रयास भी करता है। कई बार कुछ अलग करने की चाह और प्रबल प्रेरणा से व्यक्ति अपने मुकाम के करीब पहुँच भी जाता है लेकिन कुछ कठिन संघर्ष को सामने देख सफलता से वंचित हो जाता है।

वे नहीं जान पाते की उनके साथ ऐसा क्यों होता है जिस कारण उनके सपने अधूरे रह जाते है और जीवन के अंतिम पलों तक उनकी इच्छाएँ आधी-अधूरी रह जाती है। ऐसी इच्छाएँ उन्हें अपने जीवन से निराश करती है क्योंकि अधिकांश लोग अपने संपूर्ण जीवन में यह जान ही नहीं पाते की सफलता कैसे हासिल हो।

दोस्तो! जीवन ‘संघर्ष’ का दूसरा नाम हैं। एक बात हमेशा याद रखिए, अपनी मंजिल का आधा रास्ता तय करने के बाद पीछे ना देखे बल्कि पूरे जुनून और विश्वास के साथ बाकी की आधी दूरी तय करे, बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है।


आगे बढ़कर भी अगर सफलता ना मिल पाई तो भी कोई बात नहीं कम से कम अनुभव तो नया होगा। बार-बार हार के भी हिम्मत के साथ अपने टारगेट की तरफ कदम बढ़ाना ही संघर्ष है। अपनी हर असफलता से कुछ सीखिए और निडरता के साथ संघर्ष का दामन थाम के मंजिल की ओर आगे बढ़िए।

जब तक जीवन में संघर्ष नहीं होता तब तक जीवन जीने के अंदाज को, सच्ची खुशी को, आनंद को, सफलता को अनुभव भी नहीं कर सकते। जिस तरह बिना चोट के पत्थर भी भगवान नहीं होता। ठीक उसी तरह मनुष्य का जीवन भी संघर्ष की तपिश के बिना ना तो निखर सकता है, ना शिखर तक पहुँच सकता है और ना ही मनोवांछित सफलता पा सकता है।

दोस्तों यदि जीवन को अध्ययन और अभ्यास की तरह देखा जाए तो जीवन संघर्ष नहीं है। किंतु उसी अध्ययन और अभ्यास को कठिन परिस्थितियों के रूप में देखा जाए तो जीवन में संघर्ष है। जीवन में हर अवस्था में संघर्ष के मायने अलग होते है। जैसे बच्चा घुटनों पर चलता है और पैरों पर चलने के लिए संघर्ष करता है और पैरों पर चलने लगता है तो दौड़ने के लिए संघर्ष करता है। इसी प्रकार जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है संघर्ष के मायने बदलते जाते हैं। संघर्ष वस्तुतः जीवन में एक अभ्यासक्रम है। यदि उसको सहजता से स्वीकार किया जाता है और अभ्यास के साथ उसके अनुभव को प्राप्त कर आगे बढ़ा जाता है। इसी प्रकार जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है वैसे वैसे आपके जीवन में नए विषय आते-जाते है। जिनके प्रति आपका कोई अनुभव नहीं होता उन विषयों के प्रति आपका अभ्यासक्रम शुरू होता है। 

अनुभव हीनता के कारण कुछ असफलताएं और कुछ परिश्रम व्यर्थ गंवाने पड़ते हैं जो वैचारिक रूप से संघर्ष प्रतीत होते हैंं। किंतु एक बार अनुभव प्राप्त होने के बाद वही विषय पुनः जब आपके सामने आता है तो वह संघर्ष नहीं लगता। 

 दोस्तों अतः संघर्ष जीवन का अभ्यासक्रम है और जिसे स्वीकार करना पड़ेगा। यदि आप इसे अभ्यासक्रम की तरह स्वीकार करेंगे तो आपके अनुभव हमेशा बढ़ते रहेंगे और यह अनुभव जीवन के अंतिम अवस्था तक सुख का कारक होंगे।

क्योंकि ”संघर्ष हमारे जीवन का सबसे बड़ा वरदान है और वो हमें सहनशील, संवेदनशील और देवतुल्य बनाता हैं।” संघर्ष के इस सूत्र को समझिए और उसपर चलने की कोशिश कीजिए। यकीन मानिए आप जीवन को एक अलग रूप से देखने लगेंगे।
 

आप सोच रहे होंगे यह सब पढ़ना या लिखना बहुत आसान है लेकिन करना बहुत ही मुश्किल! दोस्तों, जीवन कभी भी आसान नहीं होता। सरलता व सहजता से कभी किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ। इतिहास गवाह है इस बात का आज भी लोग महान और सफल लोगों को उनके संघर्ष से उन्हें याद करते है।

Welcome to जीवन एक संघर्ष है 

संघर्ष से डर के जीवन में अपने कदमों को पीछे मत कीजिए। आज का संघर्ष आपके कल को सुरक्षित करता है। आप जिस तरह का संघर्ष करते है भाग्य भी उसी के अनुरूप फल देता है। यह सत्य है जीवन में कई बार बुनियादी, सामाजिक, पारिवारिक आदि समस्याएँ आ जाती है तब लक्ष्य के प्रति संघर्ष की इच्छाशक्ति को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है क्योंकि ऐसी परिस्थिति में जीवन का संघर्ष कई गुणा बढ़ जाता है।

लेकिन ऐसी स्थिति में भी सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अपनी आंतरिक इच्छाशक्ति की ताकत और शारीरिक व मानसिक क्षमता के बल पर किसी भी संघर्ष से जूझ सकता है बस उसमें अपने लक्ष्य के प्रति ललक होनी चाहिए। क्योंकि ”जितना कठिन संघर्ष होगा, जीत भी उतनी ही शानदार होगी।”
क्योंकि संघर्ष ही जीवन है। जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है। इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं। जिसने संघर्ष (Struggle) करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया।
दोस्तों जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ। तरह-तरह के संघर्षों का सामना आएदिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है। जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता।

जीवन में अगर संघर्ष नहीं हो, तो जीने का क्या मज़ा? कोई भी डायरेक्टर उसी एक्टर को अच्छा और मुश्किल किरदार देता है, जो की उसे कर पाने के काबिल होता है। उसी प्रकार भगवान् इस दुनिया का निर्देशक है, वो भी सबसे ज्यादा अच्छा और मुश्किल किरदार उसी को देता है, जो उसे कर पाने के काबिल होता है। बस फर्क है सोच का। कोई उस संघर्ष से भरे किरदार को कोसता रहता है, तो कोई उस किरदार को मज़े से निभाता है। जो भी उस किरदार को स्वीकार करके उस संघर्ष से एक हीरो की तरह बाहर आ जाता है, वो इस दुनिया का प्रिय बन जाता है और लोग उसी की मिसाल देते हैं।

अगर सब कुछ मिल जायेगा जिंदगी में तो तमन्ना किसकी करोगे,
अगर सब कुछ मिल जायेगा जिंदगी में तो तमन्ना किसकी करोगे,
 

Welcome to जीवन एक संघर्ष है

कुछ अधूरी ख्वाहिशें तो जिंदगी जीने का मज़ा देती है। ।

दोस्तों Struggle जीवन का जरुरी हिस्सा है. संघर्ष ही जीवन है. इससे कोई बच नहीं सकता. हम सबकी प्रॉब्लम अलग हो सकती है, लेकिन सभी को अपने हिस्से का Life Struggle करना ही पड़ता है.

संघर्ष ही जीवन है जिन्होंने संघर्ष ना किया हो उन्हें जीवन भर संघर्ष का सामना करना पड़ता है जो निम्न है

संघर्ष के प्रकार

 
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संघर्ष परिणामों के उदाहरण

 
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संकल्प रणनीतियाँ 

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दोस्तों, संघर्ष के साथ जीवन जीने का मजा ही कुछ और है।

अगर जीवन में संघर्ष न हुआ तो, जो खुशी होती है बहुत दुख के बाद मिलती है वह शायद मिलेगी ही नहीं। हाँ माना कि संघर्ष से जूझना बहुत ही मुश्किल काम है और यह काम वही कर पाता है, जो मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत है। हम अपने पूरे जीवन में कई बार ऐसे मोड़ से गुजरते हैं जहाँ हमको बहुत उतार-चढ़ाव से जूझना पड़ता है, बहुत सारे संघर्ष देखने पड़ते हैं। लेकिन यह संघर्ष बहुत जरूरी होते हैं। क्योंकि यही हमें सिखाते हैं आखिर खुशी होती क्या है, और गम होता क्या है।


दोस्तों एक मनुष्य के जीवन में संघर्ष की परिस्थितियाँ आती ही रहती हैं| अतः मनुष्य को डटकर उनका सामना करना चाहिए और उसे कभी किसी परिस्थिति से डरकर भागना नहीं चाहिए क्योंकि जीवन में संघर्ष के क्षण तो आते ही रहते हैं| अगर मनुष्य संघर्ष करने से डर जाता है अथवा पीछे हट जाता है तो उसका जीवन सार्थक नहीं होगा| अतः मनुष्य को प्रत्येक परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए|

जीवन उसी का नाम है, जो संघर्षों से गुजरे,
उसका जीवन क्या जीवन है, जो बच-बच के निकले।
माना संघर्षों में हमको, दुख उठाना पड़ता है,
लेकिन दुख के बाद हमें, सुख अनुभव का होता है।
देखो सुबह के सूरज को, जो बादलों को चीर के निकले,
अपनी इस ताकत से वो, रात के अंधेरे को निगले।
इसी अपनी ताकत से वो, दुनिया में पूजा जाए,
कोई उसको 'रब' कहता, कोई अपना 'इश्क' बतलाए। 

Welcome to जीवन एक संघर्ष है


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