दोस्तों अगर हमने  अपना सत्य बता दिया तो रहस्य क्या रह जाएगा, वैसे भी दुनिया में सत्य का कोई महत्व नहीं है, यदि हम  सत्य बताएंगे  तो मजाक समझेगे। दुनिया सबूत मांगती है और दिखावा पसन्द करती है।

हमारा  जीवन साफ़ पानी की तरह पारदर्शी है। हम  जो भी निर्णय  लेते है, वो सोच समझकर लेते हैं। फ़िर ऐसे में कोई सत्य छुपाने का सवाल ही नहीं उठता है । और इसके लिए हम अपने  माता-पिता ,भाई ,बहन ईश्वर सबको दें।

और अगर आप बोलो के हर किसी के एक ना एक सत्य होता है तो अगर बता दिए तो वो सत्य नहीं रह जाएगा

दोस्तों हम कुछ जिंदगी के सत्य बाते  प्रस्तुत कर  रहे है:

100% सत्य बोलना भी कठिन है?


Welcome to आज के सबसे कठिन सत्य कौन से हैं?



1.इंसानों को बांधने के लिए जिन मोबाइलों का जिक्र किया गया है, वे उन्हें अकेला बना रहे हैं

2.एक 5 साल की लड़की, जिसे खेलने के अलावा कुछ भी नहीं पता है, बहुत बुरा बर्ताव किया जाता है ताकि उनकी बुरी इच्छाओं को दूर किया जा सके

. जो आपको छोड़कर जा चुके हैं, वो कभी लौटकर नहीं आएंगे ये 100% सत्य है।

4. प्रत्येक महिला सम्मान चाहती है और वह सम्मान की हकदार है ये 100% सत्य है।

5. प्रत्येक की ज़िंदगी में कोई चीज़ ऐसी जरूर होती है जो अधूरी रह जाती है ये 100%सत्य है।

6. आपकी मृत्यु एक न एक दिन होगी ये 100%सत्य है।

7. सभी की ज़िंदगी में सुख और दुःख जरूर आते हैं ये 100% सत्य है।

8. ज़िन्दगी में एक ऐसा मोड़ जरूर आएगा,जब आप खुद को सबके होते हुए भी अकेला महसूस करोगे ये 100%सत्य है।

9. आपके प्रत्येक फैसले में सभी की सहमति हो, ऐसा हमेशा नहीं होगा ये 100% सत्य है। 

10. प्रत्येक व्यक्ति की ज़िंदगी में एक बार अच्छा समय जरूर आता है ये 100% सत्य है।

(11) तुम जो हँसोगे, दुनिया हँसेगी ।।

रोओगे तुम, तो न रोएगी दुनिया ।।

(12) पैसा खत्म होते ही, सबसे पहले वे सब के सब, तुम्हारी दुनिया से " होकर मजबूर " चले जायेंगे ।।


(13) यदि कुछ करना ही चाहते हो -

तो दूसरों का थोड़ा सा भला कर दो।।


(14) पैसे का सबसे अच्छा और टिकाऊ निवेश - बच्चों की शिक्षा में।

(15) इस धरती पर, जितने भी फल पैदा होते हैं या कभी भी पैदा हो सकते हैं ; उनमें सबसे मीठे फल :

!!!! मेहनत का फल !!!!

और

!!!*!! सब्र का फल !!*!!!


(16) वो भी (अच्छा समय) नहीं रहा।।। यह ही (बुरा समय) नहीं रहेगा ।।।।।

[[[ !!!! EVEN "THIS" WILL PASS AWAY !!!! ]]]


(17) आज के माहौल में, कोरोना से बचे रहने का सरलतम् उपाय :  हमेशा याद रखो कि जो इंसान सामने है वो कोरोना का patient है। 


(18) नदी के किनारे पर खड़ा पेड़, घर में आया मेहमान, पिता के घर आई बेटी, कृपण के घर आई लक्ष्मी, गुरु के आश्रम में आया शिष्य, शाम को घोंसले में आया पक्षी -

(19) हवा, जितना जबर्दस्त विरोध पैदा करेगी, दोनों उतना ही ज्यादा ऊपर उठ कर उड़ते हैं ।।।


(20) सत्य की ज़्यादातर विजय नहीं होती , कई बार तो इतनी देर मैं होती है की उस जीत के मायने नहीं रह जाते ।इसलिए बुद्धिमत्ता को प्राथमिकता दें , असत्य ना बोलिए पर सख़्त रूख बना लम्बा ख़ामोश असत्य के पुजारियों के साथ व दूरी बना लेना भी असत्य का साथ ना देना होता है ।

(21) शारीरिक सुंदरता एक भँवर जाल है जिससे दूर रहने मैं ही भलाई है , उसका दूर से दर्शन करने मैं कोई ख़राबी नहीं पर उसका उपभोग करने की लालसा दुर्गति को न्योता देना है । उदाहरण - सर्वज्ञानि रावण

(22) कभी भी सरल व द्वेषहीन व्यक्तियों का अपमान ना करें , क्यूँकि अगर आप ऐसा करते हैं तो उनके अभिशाप व उनके मन मैं निरंतर सुलगती आग आप को अवश्य कभी भारी कष्ट देगी । आप अगर धूर्त हैं भी तो अपनी धूर्तता का इस्तेमाल धूर्त से करें , सरल व मानवीय से नहीं  

(23) शिक्षा एक निरंतर प्रक्रिया है जिसे व्यक्ति को हमेशा करते रहना चाहिए जिससे की वह समय के साथ बदलाव करता रहे और अपना मनोविश्लेषण कर अपनी मन को स्वस्थ बनाए रखे ।

(24) हम सभी शरीर मैं क़ैद हैं अतः इसे अपना निवासस्थान समझ इसके देख रेख , सफ़ाई व सबल रखना चाहिए ताकि हम दीर्घ आयु तक इसमें निवास कर सकें , समय समय पर जिस तरह घर को हम सुधारते रहते हैं , इसी तरह हमें उचित इलाज व व्यायाम कर अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहिए ।

(25) जलन व लालच हर मन के अंदर एक कीटाणु हैं जिसको अगर आप ने ऊर्जा व प्रहोत्सान दिया तो या बड़ा रोग रूप धारण कर लेता है अतः अपनी कार्यकुशलता मैं ऊर्जा लगा कर इन कीटाणु को शक्तिविहीन बना कर नष्ट करने का प्रयास निरंतर करना चाहिए , ताकि हमारी ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल कर सफलता को गले लगाना चाहिये।


(26) इच्छाओँ के वशीभूत जीव ही दुख पाता है।

(27) अन्धभक्ति, अन्धश्रद्धा, अन्धविश्वास कभी भी कहीँ का नहीँ छोड़ते।

(27) अन्धानुकरण सदैव दुख का कारण बनता है।

(29) बुद्धि बल सर्वश्रेष्ठ है ततपश्चात धन-सम्पदा बल व अन्त मेँ शारीरिक बल का स्थान आता है।

(30) अतिक्रमणकारी अपने कृत्योँ से पहले दूसरोँ को आक्रान्त करता है बाद मेँ इस कृत्य से स्वयं आक्रान्त होता है।

(31) छली, कपटी, प्रपञ्ची, लोभी, लालची, नीच, पक्षपाती का अन्त बहुत बुरा होता है चाहे सतयुग हो, त्रेता हो , द्वापर हो या फिर कलियुग ही क्योँ न हो।

(32) करुणा, दया, निष्पक्षता, निस्पृहता सदैव सर्वश्रेष्ठ हैँ

(33) बहुतोँ ने अमरता का वरदान ईश्वर से माँगा पर मरे सब के सब अर्थात यदि जन्म सत्य है तो मृत्यु अटल। 

(34) जीवन आपका,

जीनेटक या वंशानुगत प्रवृत्ति आपकी ,

वातवरण के संस्कार आपके

ऐसे में आप दूसरे के सुझाए गए निष्कर्ष से या सुझाव के रिमोट से भला क्यों चलना चाहेंगे,,? नहीं


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